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Editor: Naresh Prasad Soni
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असम के रण में हेमंत सोरेन की हुंकार: 'सत्ताधीश राजनेता नहीं मुनाफाखोर व्यापारी हैं, मैं उनके गले की वह फांस हूं जिसे उगला नहीं जा सकता'

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असम के रण में हेमंत सोरेन की हुंकार: 'सत्ताधीश राजनेता नहीं मुनाफाखोर व्यापारी हैं, मैं उनके गले की वह फांस हूं जिसे उगला नहीं जा सकता'



गुवाहाटी/रांची। असम में आयोजित विशाल आदिवासी महासभा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र और असम की सत्ताधारी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और आक्रामक प्रहार किया है। जनसमूह को संबोधित करते हुए सोरेन ने हुंकार भरी कि वर्तमान में जो लोग सत्ता के शीर्ष पर काबिज हैं, उनका चरित्र राजनीतिक नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से व्यापारिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग केवल लेना जानते हैं, जनता को कुछ देना इनकी फितरत में नहीं है। मुख्यमंत्री ने आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का वास्ता देते हुए कहा कि हम उन महान पुरखों के वंशज हैं जो कभी झुकना नहीं जानते, बल्कि सत्ता की आंखों में आंखें डालकर बात करने का माद्दा रखते हैं।

​हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में विरोधियों को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि दमनकारी नीतियों के तहत उन्हें जेल में डाला गया, लेकिन वे यह भूल गए कि आदिवासी समाज का यह बेटा उनके गले की ऐसी हड्डी बन जाएगा, जिसे न तो निगला जा सकेगा और न ही उगला। उन्होंने कहा कि हम उस गौरवशाली परंपरा के सिपाही हैं, जहां संघर्ष की राह में ही मंजिल और ठहराव है। जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद वे और अधिक मजबूती से उभरे हैं और आज दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मंच 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' में आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।

​झारखंड मॉडल का उदाहरण पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां एक ओर तथाकथित 'व्यापारी सरकारें' जनता का शोषण कर रही हैं, वहीं झारखंड सरकार ने महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि आज झारखंड की 56 लाख माताएं-बहनें हर महीने 2500 रुपये की सम्मान राशि प्राप्त कर रही हैं। यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनके स्वावलंबन और परिवार के भविष्य को संवारने का एक सशक्त माध्यम है। सोरेन ने आदिवासी समाज से एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि बिखराव से बचने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होना समय की सबसे बड़ी मांग है।

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