सनातन विरोधी बयान पर बवाल: हजारीबाग में भाजपा ने फूँका मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला
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| गुरुवार को शहर के ऐतिहासिक झंडा चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का जोरदार विरोध करते हुए उनका पुतला दहन किया। |
क्या है पूरा मामला?
18 मार्च 2026 को विधानसभा बजट सत्र के समापन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश की प्रगति और धार्मिक मान्यताओं की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि भारत में विश्वकर्मा, सरस्वती और लक्ष्मी पूजा बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन तकनीकी निर्माण में चीन, बौद्धिक प्रतिभा में विदेश और संपत्ति के मामले में अमेरिका आगे है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ पूजा-पाठ से भारत 'विश्व गुरु' नहीं बन सकता।
"जनता देगी वोट की चोट" - विवेकानंद सिंह
पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने मुख्यमंत्री के इस बयान को सीधे तौर पर सनातन धर्म पर हमला करार दिया। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री ने पवित्र सदन में हिंदू देवी-देवताओं का नाम लेकर जिस तरह का उपहास किया है, उसे झारखंड की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। यह बयान उनकी सनातन विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।"
विवेकानंद सिंह ने आगे कहा कि विकास और पूजा-पाठ को एक-दूसरे का विरोधी बताना मूर्खतापूर्ण है। भारतीय संस्कृति हमेशा से ज्ञान और समृद्धि की जननी रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी चुनावों में राज्य की जनता इस अपमान का बदला 'वोट की चोट' से लेगी।
भाजपा कार्यकर्ताओं का भारी विरोध
झंडा चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए। भाजपा जिला मंत्री सह मीडिया प्रभारी जय नारायण प्रसाद द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
भाजपा नेताओं का तर्क है कि मुख्यमंत्री को विकास के मुद्दों पर बात करनी चाहिए न कि बहुसंख्यक समाज की आस्था को ठेस पहुँचानी चाहिए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हेमंत सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के विवादित बयान दे रही है।
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख चेहरा
इस पुतला दहन कार्यक्रम में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुदेश चंद्रवंशी, जिला पदाधिकारी रेणुका साहू, जय नारायण प्रसाद, अजीत चंद्रवंशी, महेंद्र राम बिहारी, मनोरमा राणा और जितेंद्र जैन मुख्य रूप से शामिल थे। इनके अलावा निशिकांत सिंह, विजय वर्मा, ज्योत्सना देवी, विवेक बैरियर, ऋषि शर्मा, तरुण कसेरा, शिवपाल यादव, रामाशंकर प्रसाद और अर्जुन साहू सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

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