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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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भारतीय नौसेना की बढ़ी समुद्री ताकत: चौथा विशाल सर्वेक्षण पोत 'संशोधक' बेड़े में शामिल, 'आत्मनिर्भर भारत' को मिली नई उड़ान

भारतीय नौसेना की बढ़ी समुद्री ताकत: चौथा विशाल सर्वेक्षण पोत 'संशोधक' बेड़े में शामिल, 'आत्मनिर्भर भारत' को मिली नई उड़ान

GRSE कोलकाता द्वारा निर्मित 'संशोधक' के साथ चार सर्वेक्षण पोतों की परियोजना हुई पूरी; 80% स्वदेशी उपकरणों से लैस यह पोत गहरे समुद्र के रहस्यों को सुलझाने में होगा सक्षम।

कोलकाता/नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को सिद्ध करते हुए, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) कोलकाता ने चार सर्वेक्षण पोतों (SVL) की श्रृंखला का अंतिम और चौथा जहाज 'संशोधक' (यार्ड 3028) 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया है।

INS Sanshodhak Survey Vessel Large Indian Navy GRSE Kolkata Handover Ceremony

परियोजना का समापन और गौरवशाली इतिहास

भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा संकल्पित इस चार-पोतों की परियोजना की शुरुआत 30 अक्टूबर 2018 को हुए अनुबंध के साथ हुई थी। 'संशोधक' की डिलीवरी के साथ ही यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब पूर्णता की ओर है। इससे पहले इस श्रेणी के तीन अन्य पोत पहले ही नौसेना की ताकत बढ़ा रहे हैं:

आईएनएस संधायक: 3 फरवरी 2024

आईएनएस निर्देशक: 18 दिसंबर 2024

आईएनएस इक्षक: 6 नवंबर 2025

क्यों खास है 'संशोधक'? (तकनीकी क्षमताएं)

यह पोत न केवल आकार में विशाल है, बल्कि आधुनिक तकनीक का बेजोड़ नमूना भी है

विस्थापन और गति: 3400 टन विस्थापन वाला यह जहाज 110 मीटर लंबा है और दो शक्तिशाली डीजल इंजनों की मदद से 18 समुद्री मील (18 Knots) से अधिक की रफ्तार पकड़ सकता है।

अत्याधुनिक उपकरण: इसमें डेटा अधिग्रहण प्रणाली, स्वायत्त जलमार्ग वाहन (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड वाहन (ROV), और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसे हाई-टेक हाइड्रोग्राफिक उपकरण लगे हैं।

बहुआयामी भूमिका: यह जहाज तटीय और गहरे पानी के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण के साथ-साथ नौवहन चैनलों के निर्धारण और समुद्र विज्ञान डेटा एकत्र करने में सक्षम है।

स्वदेशी शक्ति का प्रदर्शन

'संशोधक' की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। यह न केवल भारतीय उद्योग और MSME क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की बढ़ती समुद्री धाक का भी प्रतीक है।

"संशोधक की डिलीवरी भारतीय नौसेना और देश के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच सहयोगात्मक प्रयासों का परिणाम है। यह समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाएगा।"

Naresh Soni Editor in Chief. (newsprahari.in)

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