पदमा में विकास की नब्ज टटोलने पहुंचे डीसी, 57 बच्चों पर एक शिक्षक देख जताई चिंता, पंचायत भवन के खर्च के ऑडिट का दिया सख्त फरमान
हजारीबाग।
प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के उद्देश्य से हजारीबाग के उपायुक्त
शशि प्रकाश सिंह ने शनिवार को पदमा प्रखंड का सघन दौरा किया। समाहरणालय की चहारदीवारी से निकलकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पहुंचे उपायुक्त का यह निरीक्षण महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पंचायत से लेकर विद्यालय तक की व्यवस्था में कसावट लाने के लिए अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। बंदरबेला पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सर्वोपरि है। पंचायत भवन के संचालन हेतु आवंटित सरकारी राशि के पाई-पाई का हिसाब मांगते हुए उन्होंने बीडीओ को व्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने और अनिवार्य रूप से ऑडिट कराने का कड़ा निर्देश दिया। निरीक्षण के क्रम में सीएससी केंद्र, जन्म-मृत्यु पंजी के संधारण और ग्राम सभा की कार्यवाही पंजियों का बारीकी से अवलोकन कर उन्होंने व्यवस्था को सुदृढ़ करने की हिदायत दी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा और आजीविका मिशन पर भी उपायुक्त की विशेष नजर रही। जेएसएलपीएस के तहत स्वयं सहायता समूहों (दीदी समूहों) के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने क्रेडिट लिंकेज के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र में उनकी सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, मनरेगा के तहत आम बागवानी योजना का जायजा लेते हुए उन्होंने मस्टर रोल की सत्यता जांची और डीपीएम को कार्यस्थल पर मौजूद सभी श्रमिकों के जॉब कार्ड उसी दिन कार्यालय में तलब करने का आदेश दिया, जो श्रम कानूनों के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है।
दौरे का सबसे संवेदनशील पहलू शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का उजागर होना रहा। उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय दोनाई खुर्द के निरीक्षण में यह विडंबना सामने आई कि वहां नामांकित 57 नौनिहालों का भविष्य महज एक शिक्षक के भरोसे है। पठन-पाठन की इस दयनीय स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने सहायक शिक्षकों की पदस्थापना हेतु त्वरित विभागीय कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। इसके अतिरिक्त बघरा नदी पर निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता परखने के बाद, उपायुक्त ने अधिकारियों को 'लकीर का फकीर' बनने के बजाय दूरगामी सोच अपनाने की नसीहत दी। उन्होंने पंचायतों के समग्र और समावेशी विकास के लिए आगामी पांच वर्षों का एक ठोस 'विजन डॉक्यूमेंट' और रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि विकास योजनाओं को धरातल पर मूर्त रूप दिया जा सके। इस औचक निरीक्षण के दौरान जिला योजना पदाधिकारी पंकज कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी समेत कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।



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