सेंट्रल जेल ब्रेक का 'द एंड' फिल्मों की तरह भागे तीन खूंखार कैदी महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार, ईंट-भट्ठे पर कर रहे थे मजदूरी
हजारीबाग: जय प्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (सेंट्रल जेल) से नए साल की पूर्व संध्या पर फिल्मी स्टाइल में फरार हुए तीन खूंखार कैदियों के दुस्साहस का अंत हो गया है। हजारीबाग पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इन तीनों भगोड़ों को झारखंड से हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। ये तीनों अपराधी अपनी पहचान छुपाकर वहां एक ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर रहे थे, लेकिन पुलिस की तकनीकी निगरानी और सटीक मुखबिरी से वे बच नहीं सके।
बेडशीट की रस्सी और लोहे की रॉड काटकर रची थी साजिश
घटना 31 दिसंबर 2025 की देर रात की है, जब पूरा शहर नए साल के जश्न में डूबा था। इसी का फायदा उठाते हुए देवा भुईयां, राहुल रजवार और जितेन्द्र रवानी ने जेल की सुरक्षा में सेंध लगाई। इन शातिर अपराधियों ने पहले खिड़की की लोहे की रॉड को काटा और फिर बेडशीट को फाड़कर उसकी रस्सी बनाई। उसी रस्सी के सहारे वे जेल की ऊंची दीवारों को लांघकर अंधेरे में गायब हो गए थे। तीनों कैदी धनबाद जिले के रहने वाले हैं और गंभीर अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
झारखंड से महाराष्ट्र तक: 1500 किलोमीटर की भागमभाग
फरार होने के बाद इन कैदियों ने पुलिस को चकमा देने के लिए कई बार अपनी लोकेशन बदली। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि जेल से निकलकर वे सबसे पहले सिंदूर चौक पहुंचे, फिर कुरहा, बरकट्ठा और बरही होते हुए कोडरमा और गया निकल गए। गया से ट्रेन पकड़कर वे जसीडीह पहुंचे, जहां उन्होंने दो दिनों तक ट्रेन का इंतजार किया। इसके बाद जसीडीह-पुणे एक्सप्रेस पकड़कर वे महाराष्ट्र के दौंड जंक्शन पहुंचे और वहां से बस द्वारा सोलापुर के करमाला स्थित ईंट-भट्ठे पर पनाह ली।
एसआईटी का गठन और पुलिस का एक्शन
इस दुस्साहसिक जेल ब्रेक को चुनौती मानते हुए हजारीबाग एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ अमित आनंद के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। टीम ने तकनीकी शाखा की मदद से इनका पीछा करना शुरू किया। पुलिस की टीमें लगातार गिरिडीह, धनबाद, कोडरमा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर रही थीं। अंततः सुराग मिलते ही पुलिस टीम महाराष्ट्र पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से तीनों को दबोच लिया। तीनों अपराधियों को ट्रांजिट रिमांड पर हजारीबाग लाया गया है।
अपराध का पुराना इतिहास
गिरफ्तार कैदियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इनमें मुख्य रूप से देवा भुईयां और राहुल रजवार पर लूट, डकैती और पोक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में दर्जनों केस दर्ज हैं। देवा भुईयां इससे पहले 2021 में धनबाद जेल की दीवार फांदकर भाग चुका था, जिसके बाद उसे सुरक्षा के लिहाज से हजारीबाग सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था, लेकिन उसने यहां भी सुरक्षा को धता बता दिया।
हजारीबाग पुलिस ने इस कार्रवाई से यह संदेश दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितनी भी दूर क्यों न भाग जाए, वह पुलिस की गिरफ्त से बच नहीं सकता।

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