शांतिपूर्ण जन-आंदोलन को कलंकित करने की रची गई 'हिंसक पटकथा', सीसीटीवी फुटेज मेरी निष्पक्षता का अकाट्य प्रमाण- योगेंद्र साव
नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड
हजारीबाग/केरेडारी
झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने केरेडारी थाना क्षेत्र अंतर्गत चट्टी बरियातू में चल रहे जन-आंदोलन के दौरान पगार कांटाघर के समीप घटित हिंसक घटना को आंदोलन को कुचलने और बदनाम करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है। पूर्व मंत्री ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित उनके शांतिपूर्ण सत्याग्रह का इस हिंसा से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे विरोध प्रदर्शन की मूल आत्मा को धूमिल करने का एक कुत्सित प्रयास बताया है।
योगेंद्र साव ने घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस वक्त पगार कांटाघर पर मारपीट की यह निंदनीय घटना घटी, उस समय वे स्वयं बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं और ग्रामीणों के साथ धरना स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर अडिग थे। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि इस धरना-प्रदर्शन की विधिवत लिखित सूचना और सुरक्षा की मांग पूर्व में ही अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद, घटनास्थल पर पुलिस बल की अनुपस्थिति प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही और सुरक्षा में बड़ी चूक को उजागर करती है, जिसकी उच्चस्तरीय समीक्षा अनिवार्य है।
आंदोलन को बदनाम करने की आशंका उन्हें पूर्व से ही थी, जिसके मद्देनजर करबला स्थित धरना स्थल और उनके निजी आवास परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस कर ऑनलाइन जोड़ा गया था। श्री साव ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज में उनकी उपस्थिति धरना स्थल पर स्पष्ट देखी जा सकती है, जो यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि वे हिंसा के स्थान पर मौजूद नहीं थे। वायरल वीडियो का हवाला देते हुए उन्होंने एक चौंकाने वाला तथ्य भी रखा कि मारपीट करने वाले लोग एक समान कंबल ओढ़े हुए थे, जो इस बात का प्रबल संकेत है कि यह एक प्रायोजित और सुनियोजित कृत्य था ताकि आंदोलनकारियों को अपराधी साबित किया जा सके।
पूर्व मंत्री ने घटना में घायल हाइवा चालक के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उसके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। साथ ही, जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वीडियो और सीसीटीवी फुटेज को जांच के केंद्र में रखकर दोषियों की पहचान की जाए और प्रशासन अपनी सुरक्षात्मक जिम्मेदारियों में हुई कोताही की जवाबदेही तय करे। श्री साव ने पुन: दोहराया कि उनका संघर्ष संविधान के दायरे में रहकर जनहित की रक्षा के लिए है और ऐसी साजिशें उनके लोकतांत्रिक आंदोलन की धार को कुंद नहीं कर सकतीं।

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