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Editor: Naresh Prasad Soni
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झारखंड की लोक आस्था के महापर्व टुसू और मकर संक्रांति को लेकर डुमरी विधायक सख्त, तीन जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर 14 जनवरी से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने की दी हिदायत

 

झारखंड की लोक आस्था के महापर्व टुसू और मकर संक्रांति को लेकर डुमरी विधायक सख्त, तीन जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर 14 जनवरी से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने की दी हिदायत


डुमरी/धनबाद/बोकारो/गिरिडीह : ​झारखंड की माटी और संस्कृति से जुड़े सबसे बड़े त्योहार टुसू पर्व और मकर संक्रांति के आयोजन को लेकर डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने प्रशासन को अभी से अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। छोटानागपुर की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था के प्रतीक इस महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए विधायक ने एक साथ धनबाद, बोकारो और गिरिडीह जिले के उपायुक्तों को पत्र लिखकर कड़े शब्दों में आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां पूरी करने की मांग की है। विधायक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह केवल एक त्योहार नहीं बल्कि झारखंड की पहचान है, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ नदी घाटों और तालाबों पर जुटते हैं।

​विधायक जयराम महतो ने तीनों जिलों के उपायुक्तों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि टुसू की जल-बिदाई, पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए नदी घाटों और जलाशयों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जनहित और जनसुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं। उन्होंने प्रशासन को ताकीद की है कि 14 जनवरी 2026 से पूर्व सभी प्रमुख घाटों, तालाबों, पूजा स्थलों और मेला परिसरों में युद्ध स्तर पर साफ-सफाई का अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही कचरा प्रबंधन, शुद्ध पेयजल, रात के समय के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को लेकर अभी से ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया जाए ताकि पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो।

​पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि मेलों और घाटों पर अत्यधिक जनसहभागिता होती है, इसलिए भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संबंधित विभाग इस विषय को गंभीरता से लें और समयबद्ध तरीके से प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, दुर्घटना या श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से ठोस कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि झारखंड की लोक आस्था का यह महापर्व पूरी गरिमा और सुरक्षा के साथ संपन्न हो सके।

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