हजारीबाग मेयर चुनाव: 'काम नहीं तो टैक्स नहीं' के उद्घोष के साथ विनोद भगत ने फूंका चुनावी बिगुल, धनबल और प्रलोभन की राजनीति पर किया तीखा प्रहार
हजारीबाग: नगर निगम चुनाव में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच चुकी है। इसी बीच, महापौर पद के सशक्त प्रत्याशी और झारखंड आंदोलनकारी रामावतार भगत के अनुज, विनोद भगत ने एक वृहद प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए अपने विजन और घोषणापत्र को जनता के पटल पर रखा। चुनाव चिह्न 'टॉर्च छाप' (क्रमांक 4) पर चुनाव लड़ रहे विनोद भगत ने हजारीबाग के एक लाख सतहत्तर हजार मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करते हुए भावुक और ज्वलंत अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य शहर का सर्वांगीण और पारदर्शी विकास है। जनता से मतदान के दिन अपने सारे घरेलू और व्यावसायिक कार्य छोड़कर सबसे पहले अपने मताधिकार का प्रयोग करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि एक सशक्त नेतृत्व ही हजारीबाग को विकास के पथ पर अग्रसर कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मतदाताओं को जातिवाद, धर्मभेद (हिंदू-मुस्लिम) और धनबल के प्रलोभन से बचने की सख्त हिदायत दी।
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| "बिनोद भगत मेयर प्रत्याशी हजारीबाग" |
अपने चुनावी घोषणापत्र की सबसे बड़ी और लोकलुभावन घोषणा करते हुए विनोद भगत ने 'काम नहीं तो टैक्स नहीं' का नारा बुलंद किया। उन्होंने शहरवासियों को एक बड़ी राहत का आश्वासन देते हुए होल्डिंग टैक्स में पच्चीस प्रतिशत की सीधी कटौती करने का वादा किया है। इसके अतिरिक्त, नगर निगम की कार्यप्रणाली को सुलभ और जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए उन्होंने 'मेयर मित्र' की अभिनव संकल्पना पेश की है। उन्होंने बताया कि शहर के हर क्षेत्र में आठ से दस 'मेयर मित्र' नियुक्त किए जाएंगे, जो एक चलते-फिरते कार्यालय की तरह कार्य करेंगे। जनता केवल एक फोन कॉल के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेगी और उनके दरवाजे पर ही नागरिक समस्याओं का त्वरित निवारण किया जाएगा। इसके अलावा, अपने चुनाव चिह्न से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने पूरे हजारीबाग शहर के बिजली खंभों को सोलर लाइट से जगमगाने का संकल्प लिया, ताकि रात के अंधकार में भी शहर सुरक्षित और रोशन रहे।
विपक्षी खेमे द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और चुनावी कदाचार पर विनोद भगत ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने उन सभी भ्रामक दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वे किसी अन्य प्रत्याशी के समर्थन में बैठ जाएंगे। उन्होंने अपनी दृढ़ता का परिचय देते हुए स्पष्ट किया कि करोड़ों रुपयों का प्रलोभन भी उन्हें चुनाव मैदान से डिगा नहीं सकता और वे अपनी जीत के प्रति शत-प्रतिशत से भी अधिक आश्वस्त हैं। चुनाव में शराब, मुर्गा और नोटों के वितरण की दूषित संस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने जनता को आगाह किया कि जो प्रत्याशी वोट खरीदने के लिए धन बहा रहे हैं, वे सत्ता में आने के बाद शहर की सड़कों, नालियों और विकास के पैसों की लूट खसोट ही करेंगे। इसके साथ ही, स्थानीय समस्याओं पर अपनी बेबाक राय रखते हुए उन्होंने सरकारी अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजनों से वसूली जाने वाली पार्किंग फीस को अमानवीय और चिंतनीय करार दिया तथा चुनाव जीतते ही इसे तत्काल प्रभाव से बंद करवाने की घोषणा की।
शहर की जटिल यातायात और अतिक्रमण की समस्या पर भी उन्होंने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका मानना है कि वर्तमान में फ्लाईओवर के बजाय नगर निगम की सड़कों के दोनों ओर लाइनिंग और मध्य में रेड लाइन खींचकर ही यातायात को काफी हद तक सुगम बनाया जा सकता है। खास महल की जमीन के बहुचर्चित मुद्दे पर उन्होंने निष्पक्षता का वादा करते हुए कहा कि कागजातों की गहन जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा और यदि बुलडोजर चला, तो वह बिना किसी भेदभाव के हर अवैध निर्माण पर चलेगा। अपने संबोधन के अंतिम चरण में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने एक अनूठी मांग रखी। उन्होंने कहा कि पत्रकार निर्भीक होकर समाज की सच्चाई उजागर करते हैं, इसलिए वे उपायुक्त से वार्ता कर सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को लाइसेंस युक्त पिस्टल मुहैया कराने का प्रयास करेंगे। विनोद भगत का यह प्रखर और पारदर्शी रवैया हजारीबाग के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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