“मनरेगा का विश्वास, रोजगार से विकास”: हजारीबाग में पलायन थामने और 100 दिन रोजगार की गारंटी पर प्रशासनिक महामंथन
हजारीबाग। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को सशक्त बनाने और श्रमिकों के पलायन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सोमवार को हजारीबाग समाहरणालय सभाकक्ष में प्रशासनिक मंथन हुआ। उपायुक्त श्री शशि प्रकाश सिंह के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त श्रीमती रिया सिंह ने की, जहाँ वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए "मनरेगा का विश्वास, रोजगार से विकास" अभियान का खाका तैयार किया गया। बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए कि मनरेगा अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन का आधार स्तंभ बनेगी।
समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त ने कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि मनरेगा से आच्छादित परिवारों को महज आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए उन्हें धरातल पर प्रावधानानुसार पूरे 100 दिवसों का रोजगार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को हिदायत दी कि रोजगार की मांग करने वाले इच्छुक परिवारों को विलंब का सामना न करना पड़े और उन्हें महज 15 दिनों की समयावधि के भीतर स्थानीय स्तर पर ही काम मुहैया कराया जाए। प्रशासन का मुख्य ध्येय ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन के दंश को समाप्त करना है, जिसके लिए महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।
पारदर्शिता और तकनीकी सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देते हुए बैठक में यह भी तय किया गया कि आधार से लिंक ई-केवाईसी युक्त जॉब कार्ड निर्गत करने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ग्राम सभाओं को अधिक सशक्त बनाते हुए उनकी अनुशंसा और मांग के आधार पर ही कार्यों की सूची तैयार की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अमृत सरोवरों के तटों पर व्यापक वृक्षारोपण और पुरानी लंबित योजनाओं को एक विशेष अभियान चलाकर शीघ्र पूर्ण करने की कार्ययोजना भी बनाई गई। इस मैराथन बैठक में जिले के तमाम प्रखंड विकास पदाधिकारी, कार्यक्रम पदाधिकारी और जेएसएलपीएस के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और विकास के इस नए संकल्प को धरातल पर उतारने का भरोसा दिला
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