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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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कंपनियों और बैंकों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए चतरा-हजारीबाग के सीएसपी संचालक: हजारीबाग कचहरी परिसर में बैठक कर बनाया संयुक्त संगठन

हजारीबाग में जुटे चतरा-हजारीबाग के ग्राहक सेवा केंद्र संचालक। मनमाने पैसे काटने, कम कमीशन और सुरक्षा के अभाव को लेकर बनाया संगठन।
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कंपनियों और बैंकों के शोषण के खिलाफ एकजुट हुए चतरा-हजारीबाग के सीएसपी संचालक: कचहरी परिसर में बैठक कर बनाया संयुक्त संगठन

​नरेश सोनी, प्रधान संपादक

​हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):

हजारीबाग के कचहरी परिसर में 27 सितंबर 2026 को चतरा और हजारीबाग जिले के ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों जिलों के संचालकों ने अपनी समस्याओं और लगातार हो रहे शोषण को लेकर गहन विचार-विमर्श किया तथा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक संयुक्त संगठन का गठन किया।

Press release copy of CSP operators meeting and association formation in Hazaribagh court campus

​कंपनियों की मनमानी और बैंकों के दबाव पर जताया आक्रोश

बैठक में संचालकों ने आरोप लगाया कि संबंधित सेवा प्रदाता कंपनियों और बैंकों द्वारा सीएसपी संचालकों पर लगातार अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। कंपनियों द्वारा संचालकों की आईडी से बिना किसी पूर्व सूचना या कारण के मनमाने ढंग से रुपये काट लिए जाते हैं। इसके अलावा संचालकों का कमीशन घटा दिया गया है और उन पर टीवी, पंखा, बैग जैसे सामान जबरन ग्राहकों को बेचने का दबाव बनाया जाता है। जब संचालक इसकी शिकायत करते हैं, तो बैंक उन्हें कंपनी के पास भेजते हैं और कंपनियां बैंक का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेती हैं।

​कोरोना काल में जान जोखिम में डाली, अब तकनीकी सपोर्ट तक नहीं मिलता

संचालकों ने दर्द साझा करते हुए कहा कि उन्होंने दशकों से गांव-गांव जाकर ग्रामीणों के बैंक खाते खोले और घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई हैं। कोरोना महामारी के भीषण दौर में भी अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता को वित्तीय सेवाएं और सरकारी राहत राशि वितरित की। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, जीवन ज्योति बीमा और अटल पेंशन योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को धरातल पर उतारा, लेकिन उन्हें केवल पहले साल का मामूली कमीशन दिया जाता है, जबकि रिन्यूअल का सारा पैसा कंपनियां रख लेती हैं। भारी कटौती के बावजूद संचालकों को समय पर तकनीकी सहायता (टेक्निकल सपोर्ट) तक नहीं मिलती।

​12 घंटे काम, लूटपाट का खतरा और सुरक्षा का अभाव

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सीएसपी संचालकों से सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक यानी 12-12 घंटे लगातार काम लिया जाता है। आईडी बंद होने पर कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती और न ही उनकी आईडी या आजीविका की कोई विधिक सुरक्षा है। इसके साथ ही सुदूर ग्रामीण इलाकों में कैश का लेन-देन करने के कारण संचालक लगातार अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। आए दिन लूटपाट और दुर्घटनाओं में संचालकों की जान जा रही है, लेकिन इसकी जवाबदेही लेने वाला कोई नहीं है।

​संचालकों ने कहा कि बैंकों और कंपनियों के दोहरे रवैये व मानसिक प्रताड़ना के कारण वे गंभीर तनाव में जीने को विवश हैं। नवगठित संगठन के माध्यम से अब इन मांगों को उच्च अधिकारियों और प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। 

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