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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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जी.एम. महाविद्यालय हजारीबाग के भूगोल विभाग का शैक्षणिक भ्रमण: पुरी, कोणार्क व भुवनेश्वर में छात्रों ने सीखी तटीय भू-आकृति व प्राचीन वास्तुकला की बारीकियां

जी.एम. कॉलेज हजारीबाग के भूगोल छात्रों का 5 दिवसीय ओडिशा शैक्षणिक भ्रमण संपन्न। कोणार्क मंदिर, चिल्का झील व पुरी में सीखी भौगोलिक बारीकियां।
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जी.एम. महाविद्यालय हजारीबाग के विद्यार्थियों का पांच दिवसीय ओडिशा शैक्षणिक भ्रमण संपन्न: पुरी, चिल्का व कोणार्क में छात्रों ने प्रत्यक्ष अवलोकन कर समझे भूगोल व वास्तुकला के रहस्य

​नरेश सोनी, प्रधान संपादक

​हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):

जी.एम. महाविद्यालय, हजारीबाग के भूगोल विभाग (बीए सेमेस्टर-8) के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण गुरुवार, 08 अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 04 अक्टूबर से 08 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस शैक्षणिक यात्रा का नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन भूगोल विभाग के प्राध्यापक दीपेंद्र कुमार द्वारा किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने ओडिशा के ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से समृद्ध स्थलों— पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर का भ्रमण कर व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया।

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​समुद्री भूगोल, चिल्का झील और प्राचीन वास्तुकला का गहन अध्ययन

इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से परे धरातल पर प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर मिला:

  • ​समुद्री भूगोल व तटीय स्थलाकृतियां: पुरी स्थित मरीन बीच एवं गोल्डन बीच पर छात्रों ने समुद्री लवणता, ज्वार-भाटा, तटीय अपरदन एवं निक्षेपण से बनने वाली स्थलाकृतियों तथा द्वीपों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष समझा।
  • ​चिल्का झील में पारिस्थितिकी तंत्र: प्रसिद्ध चिल्का झील में विद्यार्थियों ने बैकवॉटर, समुद्री गतिविधियां, इरावदी डॉल्फिन, प्रवाल भित्ति (कोरल रीफ), मूंगा-मोती निर्माण की प्रक्रिया और प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक पर्यावास का सूक्ष्म अवलोकन किया।
  • ​कोणार्क व जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला: छात्रों ने 1250 ईस्वी में राजा नरसिंह देव प्रथम द्वारा निर्मित विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर की बेजोड़ इंजीनियरिंग, प्राचीन वास्तुकला और कोणार्क समय चक्र (धूप घड़ी) की वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया। इसके साथ ही जगन्नाथ मंदिर (पुरी) की भव्य संरचना और स्थापत्य कला की तकनीकी बारीकियों को भी जाना।

​धरातल पर देखकर ही भूगोल को गहराई से समझ सकते हैं छात्र: प्राचार्य

शैक्षणिक भ्रमण दल को रवाना करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य श्री विनय कुमार ने हरी झंडी दिखाई और विद्यार्थियों को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और जिज्ञासा का संचार करते हैं। भूगोल जैसे विषय को जब विद्यार्थी स्वयं धरातल पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं, तभी वे तार्किक और वैज्ञानिक तरीके से भौगोलिक तत्वों को आत्मसात कर पाते हैं। उन्होंने पर्यटन को मानसिक शांति और व्यक्तित्व विकास का भी एक अहम साधन बताया।

​निदेशक ने कदम से कदम मिलाकर साझा की जानकारियां

भ्रमण के दौरान महाविद्यालय के निदेशक श्री शंभू कुमार स्वयं विद्यार्थियों के साथ हर पर्यटन व अध्ययन स्थल पर मौजूद रहे। उन्होंने प्रत्येक स्थल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व की विस्तृत जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा कर उनका मार्गदर्शन किया।

​इन्होंने निभाई यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका

इस पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के सफल संचालन और प्रबंधन में महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक रंजन कुमार के साथ-साथ मनोज कुमार, सरोज एक्का, करुणा यादव और निकिता कुमारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भ्रमण से लौटे छात्र-छात्राओं ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक और अविस्मरणीय अनुभव बताया।

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