एनएच-33 चौड़ीकरण मुआवजा घोटाला: हजारीबाग एसीबी ने की बड़ी कार्रवाई, तत्कालीन अमीन और प्रधान सहायक को किया गिरफ्तार
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
हजारीबाग / रामगढ़ (न्यूज़ प्रहरी):
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), प्रमंडलीय कार्यालय हजारीबाग की टीम ने एनएच-33 चौड़ीकरण परियोजना में भूमि अधिग्रहण मुआवजे के भुगतान में हुई भारी वित्तीय अनियमितता और गबन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले के दो नामजद आरोपियों—मांडू अंचल के तत्कालीन अमीन और जिला भू-अर्जन कार्यालय, रामगढ़ के तत्कालीन प्रधान सहायक को गिरफ्तार कर लिया है।
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| Hazaribagh ACB press release on arrest of former head assistant and amin in land scam |
एनएच-33 के चौड़ीकरण में फर्जीवाड़े का था मामला
यह पूरा मामला रामगढ़ जिला अंतर्गत मांडू अंचल के मौजा जोड़ाकरम स्थित जमीन से जुड़ा हुआ है। परियोजना एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान खाता संख्या 126, प्लॉट संख्या 2677, कुल रकबा 1.92 एकड़ भूमि (पंचाट संख्या 02) का अधिग्रहण किया गया था। इस भूमि के मुआवजे के भुगतान में सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों की अनदेखी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और वित्तीय अनियमितता बरतने का गंभीर आरोप था।
इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) हजारीबाग थाने में तत्कालीन सहायक, प्रधान सहायक, अमीन, कानूनगो एवं अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ कांड संख्या 13/2018 (दिनांक 18.09.2018, धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी, 406 भा०द०वि० एवं धारा 07(बी), 11, 13(2) भ्रष्टाचार निवारण (संशोधित) अधिनियम 2018) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अनुसंधान के क्रम में दोनों अभियुक्तों पर कसा शिकंजा
कांड के लंबे अनुसंधान एवं साक्ष्यों के संकलन के उपरांत एसीबी की विशेष जांच टीम ने 1 अक्टूबर 2026 को छापेमारी कर दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:
- बालेश्वर प्रसाद (उम्र लगभग 69 वर्ष), पिता- स्वर्गीय परमेश्वर महतो, निवासी- ग्राम मेरु, थाना- मुफस्सिल, जिला- हजारीबाग (तत्कालीन अमीन, मांडू अंचल, जिला- रामगढ़)।
- प्रवीण कुमार सिन्हा (उम्र लगभग 63 वर्ष), पिता- स्वर्गीय ब्रजकिशोर प्रसाद, निवासी- रामनगर, पेट्रोल पंप के पास, थाना- कटकमदाग, जिला- हजारीबाग (तत्कालीन प्रधान सहायक, जिला भू-अर्जन कार्यालय, रामगढ़)।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद आवश्यक विधिक एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं के उपरांत न्यायिक हिरासत में भेजने की अग्रतर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में संलिप्त अन्य तत्कालीन कर्मियों व बिचौलियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है।

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