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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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ऐतिहासिक बरही चौक को 'धरती आबा' के नाम से मिले पहचान; पीएम मोदी के दरबार पहुंची गुहार, बटेश्वर प्रसाद मेहता ने लिखा पत्र

ऐतिहासिक बरही चौक को 'धरती आबा' के नाम से मिले पहचान; पीएम मोदी के दरबार पहुंची गुहार, बटेश्वर प्रसाद मेहता ने लिखा पत्र

झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच की बड़ी मांग: कहा— चार राज्यों की राजधानियों को जोड़ने वाले इस ऐतिहासिक चौराहे का नामकरण भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर करना समूचे राज्य के लिए गौरव की बात।

हजारीबाग। हजारीबाग जिले के ऐतिहासिक और देश के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक 'बरही चौक' के नामकरण को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल की गई है। झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने देश के महान क्रांतिकारी, 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में बरही चौक का नाम बदलकर 'भगवान बिरसा मुंडा चौक' करने की पुरजोर मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर जनहित में जल्द से जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।

Bageshwar Mehta.

चार राज्यों की लाइफलाइन और क्रांति का गवाह है बरही चौक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में बटेश्वर प्रसाद मेहता ने बरही चौक के गौरवशाली और सामरिक इतिहास को प्रमुखता से रेखांकित किया है। पत्र में उल्लेख है कि ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road / NH-19, पुराना NH-2) पर स्थित बरही चौक महज एक व्यस्त चौराहा नहीं है, बल्कि यह देश का एक ऐसा प्रमुख जंक्शन है जो:

झारखंड की राजधानी रांची

बिहार की राजधानी पटना

देश की राजधानी नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को आपस में सीधे जोड़ता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' तक, बरही और इसके आसपास का पूरा क्षेत्र ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों की रणनीतियों और गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। इस चौक ने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले कई वीर सपूतों की पदचाप को महसूस किया है।

25 वर्ष की अल्पायु में हिला दी थी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव

भगवान बिरसा मुंडा के अप्रतिम योगदान को याद करते हुए मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में लिखा कि उन्होंने महज 25 वर्ष की अल्पायु में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए फिरंगियों के खिलाफ जो 'उलगुलान' (महाविद्रोह) शुरू किया था, वह आज भी देश के युवाओं के भीतर राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता है। उन्होंने न केवल शोषकों और जमींदारों के खिलाफ हथियार उठाए, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर एक समतामूलक और सशक्त समाज की स्थापना की थी।

आने वाली पीढ़ियों को मिलेगी प्रेरणा

झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच का दृढ़ विश्वास है कि यदि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के चौराहे का नाम 'भगवान बिरसा मुंडा चौक' रखा जाता है, तो देश-विदेश से यहाँ से गुजरने वाले लाखों लोग और हमारी आने वाली पीढ़ियां इस महान नायक के संघर्षों, बलिदानों और ऐतिहासिक उलगुलान से हमेशा प्रेरित होती रहेंगी। यह देश के स्वतंत्रता सेनानियों और जनजातीय नायकों के प्रति एक सच्ची और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि होगी।

संपादकीय संदेश: बरही चौक को 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की पहचान देने की यह मांग बेहद तार्किक और स्वागत योग्य है। चूंकि बरही चौक चार बड़े राज्यों और महानगरों को आपस में जोड़ता है, इसलिए इसका नामकरण देश के ऐसे महान नायक के नाम पर होना पूरे झारखंड के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव को वैश्विक पटल पर और मजबूत करेगा। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इस जनभावना से जुड़े पत्र पर त्वरित संज्ञान लेगा।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

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