तुर्किए में क्या वाकई मिल गई नूह की ऐतिहासिक कश्ती? माउंट अरारत के पास दुरुपिनार साइट पर 3D रडार स्कैन से सामने आई नाव जैसी भूमिगत संरचना
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
अंकारा / नई दिल्ली (न्यूज़ प्रहरी): इतिहास और धार्मिक ग्रंथों के सबसे बड़े रहस्यों में से एक ‘नूह की कश्ती’ (नोआज़ आर्क / Noah's Ark) को लेकर एक बार फिर दुनिया भर के पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के बीच चर्चा छिड़ गई है। पूर्वी तुर्किए में माउंट अरारत से करीब 18 मील दक्षिण में स्थित ‘दुरुपिनार साइट’ (Durupinar Site) पर शोधकर्ताओं की एक टीम ने अत्याधुनिक 3D ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) और मिट्टी के नमूनों के आधार पर चौंकाने वाले आंकड़े मिलने का दावा किया है।
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| Boat-shaped geological formation at Durupinar site near Mount Ararat in eastern Turkey with 3D radar scan results |
नाव जैसी विशाल संरचना और बाइबिल के आकार से मेल
दुरुपिनार में चट्टानों और पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक रूप से बनी यह संरचना लगभग 157 मीटर (करीब 515 फीट) लंबी है। धार्मिक ग्रंथों (बुक ऑफ जेनेसिस) में नूह की कश्ती की लंबाई 300 क्यूबिट बताई गई है, जो आधुनिक मापदंडों में लगभग इसी लंबाई के समतुल्य बैठती है। पहली बार 1959 में हवाई सर्वेक्षण के दौरान पहचानी गई इस जगह को दशकों तक महज एक प्राकृतिक भौगोलिक संरचना (फोल्डेड रॉक) माना जाता रहा था।
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| Boat-shaped geological formation at Durupinar site near Mount Ararat in eastern Turkey with 3D radar scan results |
3D रडार स्कैन में दिखे सीधे कोण और भूमिगत कॉरीडोर
तुर्किए के पुरातत्वविद सेंगेर अतिला (Cenker Atila) के नेतृत्व में 20 शोधकर्ताओं की टीम और स्वतंत्र शोधकर्ता एंड्रयू जोन्स ने बिना किसी खुदाई के 3D ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक से जमीन के 6 मीटर नीचे का अध्ययन किया।
- स्कैनिंग डेटा में प्राकृतिक चट्टानों की बेतरतीब बनावट के उलट सीधी रेखाएं, समकोण (राइट एंगल्स), सुरंगनुमा गलियारे और आपस में जुड़े हुए कक्ष जैसी बनावट दिखाई दी है।
- इसके अलावा संरचना के भीतर से एकत्र किए गए 1000 से अधिक मिट्टी के नमूनों में आसपास की जमीन की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक कार्बन पाया गया। साथ ही मिट्टी में पोटेशियम की उच्च मात्रा और कम क्षारीयता दर्ज की गई, जो प्राचीन काल की सड़ी-गली लकड़ियों (डिकंपोज्ड टिम्बर) में मिलने वाले जैविक अवशेषों से मेल खाती है।

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वैज्ञानिकों की चेतावनी: अभी अंतिम प्रमाण नहीं
इन दिलचस्प दावों के बावजूद मुख्यधारा के भूविज्ञानी और पुरातत्वविद इसे अंतिम निष्कर्ष मानने से इनकार कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है:
- कोई भौतिक अवशेष नहीं: साइट से अब तक लकड़ी का कोई टुकड़ा, धातु या औजारों के निशान जैसा कोई ठोस भौतिक अवशेष (Artifact) बरामद नहीं हुआ है।
- पीयर रिव्यू का अभाव: वर्तमान परिणाम केवल प्रारंभिक (Preliminary) अध्ययन पर आधारित हैं और इनका अभी तक स्वतंत्र वैज्ञानिकों द्वारा पीयर-रिव्यू नहीं किया गया है।
- प्राकृतिक संरचना की संभावना: अधिकांश भूविज्ञानियों का तर्क है कि सक्रिय फॉल्ट लाइन और मिट्टी के बहाव (इरोजन व मडफ्लो) के कारण हजारों वर्षों में चट्टानें प्राकृतिक रूप से भी इस प्रकार की नौका के आकार में ढल सकती हैं।
शोध दल के अनुसार, इस पूरे अध्ययन और वैज्ञानिक परीक्षणों की विस्तृत अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2027 तक सार्वजनिक होने की उम्मीद है। तभी यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी पुरातात्विक खोज है या महज एक भौगोलिक भ्रम।
नोट: यह खबर शोशल मीडिया और अन्य टेलीविज़नों में चल रहे ट्रेड के आधार पर लिखा गया है। खबर वास्तविकता कि पुष्टि न्यूज़ प्रहरी नहीं करता।

