प्रशासनिक संवेदनहीनता पर बिफरे सांसद मनीष जायसवाल: 70 दिनों से भटक रहे पीड़ित पिता के लिए प्रखंड कार्यालय में दी धरने की चेतावनी
पुत्र खोने वाले पिता को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दौड़ा रहा कार्यालय; सांसद के फोन करने पर बीडीओ ने नहीं दिया जवाब, भड़के जायसवाल।
हजारीबाग: लोकतंत्र में जनता की समस्याओं के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन हजारीबाग के डाडी प्रखंड में इसका उलट नजारा देखने को मिला। हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल गुरुवार को उस समय बेहद तल्ख तेवर में नजर आए, जब उन्हें एक बेबस पिता के आंसुओं और प्रशासनिक सिस्टम की भारी लापरवाही का सामना करना पड़ा।
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| डाडी प्रखंड |
70 दिनों का इंतजार और सिस्टम की बेरुखी
मामला गिद्दी-ए निवासी भाजपा कार्यकर्ता सियाराम सिंह से जुड़ा है। उन्होंने सांसद को बताया कि उनके पुत्र गौरव कुमार का बीते 16 फरवरी 2026 को एक सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया था। दुख की इस घड़ी में संबल देने के बजाय, डाडी प्रखंड कार्यालय उन्हें पिछले 70 दिनों से एक 'मृत्यु प्रमाण पत्र' के लिए दर-दर भटका रहा है। सभी जरूरी कागजात जमा होने के बावजूद उन्हें कार्यालय के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है।
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| अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को विवश |
सांसद का फोन नहीं उठाना पड़ा महंगा, खुद पहुंचे कार्यालय
इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने तत्काल मौके से डाड़ी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अनु प्रिया को कई बार फोन किया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बीडीओ ने सांसद का कॉल उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
जब अधिकारियों की ओर से कोई संवाद नहीं हुआ, तो सांसद सीधे डाड़ी प्रखंड कार्यालय पहुँच गए। वहां कार्यालय में सन्नाटा पसरा देख और बीडीओ को नदारद पाकर सांसद का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वहां मौजूद कर्मचारी अजीत तिवारी द्वारा फोन किए जाने पर भी बीडीओ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
24 घंटे का अल्टीमेटम: "नहीं मिला प्रमाण पत्र, तो बैठूंगा धरने पर"
अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। एक पिता अपने पुत्र को खो चुका है और सरकारी सिस्टम उसे एक कागज के टुकड़े के लिए प्रताड़ित कर रहा है।"
सांसद ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया गया, तो वे शुक्रवार शाम से प्रखंड कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को विवश होंगे।
मौके पर मौजूद गणमान्य
इस दौरान सांसद के साथ सर्वेश सिंह, अजय साहू, द्वारिका सिंह, रंजीत पांडेय, पुरुषोत्तम पाण्डेय, गुंजन साव और कई अन्य स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। सांसद के इस कड़े रुख के बाद जिले के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।


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