हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संवेदनहीनता की हद! 4 मौतों से दहला शहर, ऑक्सीजन न मिलने के आरोप पर भड़के लोग, विधायक ने संभाली कमान
स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर: नवजात शिशु की जान बचाने के लिए विधायक प्रदीप प्रसाद ने निजी खर्च पर कराया भर्ती, DC और अधीक्षक से की दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी डेस्क)। हजारीबाग का एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल, शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SBMCCH) एक बार फिर अपनी बदहाल और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कटघरे में है। गुरुवार और शुक्रवार के भीतर अस्पताल परिसर में हुई चार मरीजों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद मृतकों के परिजनों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है।
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| Mritak Ke Parijano Se Baat Karte Vidhayak Pradeep Prasad |
ऑक्सीजन की कमी और लेटलतीफी ने ली जानें?
परिजनों का सीधा आरोप है कि गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे मरीजों को समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया। कई वार्डों में जीवनरक्षक उपकरणों की भारी कमी देखी गई।
जानकारी के अनुसार मृतकों में ये शामिल हैं:
पवन कुमार अग्रवाल: हजारीबाग शहर के महावीर स्थान निवासी, जिनकी मौत का कारण समय पर ऑक्सीजन न मिलना बताया जा रहा है।
शोभा देवी: कटकमसांडी प्रखंड के बंझिया गांव निवासी (पति दीना यादव)।
सरिता कुमारी: शिवपुरी निवासी (पति मनजीत कुमार)।
चौथी मौत एक अन्य मरीज की हुई, जिसकी पहचान की जा रही है।
विधायक प्रदीप प्रसाद की त्वरित और मानवीय पहल
अस्पताल में मचे कोहराम और तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने रोते-बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाया और पूरी स्थिति की जानकारी ली।
इस दौरान जब उन्हें पता चला कि मृतका शोभा देवी का नवजात शिशु भी ऑक्सीजन की कमी और नाजुक हालत के कारण जिंदगी और मौत से जूझ रहा है, तो विधायक ने तुरंत मानवीय संवेदना का परिचय दिया। उन्होंने बिना समय गंवाए अपने निजी खर्च पर बच्चे को शहर के प्रतिष्ठित क्षितिज अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) में भर्ती कराया और उसके आगे के संपूर्ण इलाज का खर्च खुद उठाने की घोषणा की।
"अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलना बेहद ": विधायक
अस्पताल परिसर में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:
"जिस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को समय पर ऑक्सीजन जैसी मूलभूत सुविधा तक नसीब न हो, वहां की व्यवस्था को मृतप्राय ही समझा जाना चाहिए। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से गरीबों का भरोसा उठ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। स्वास्थ्य सेवाओं में ऐसी आपराधिक लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
उपायुक्त और अधीक्षक से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
विधायक प्रदीप प्रसाद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग उपायुक्त (DC) हेमंत सती और अस्पताल अधीक्षक से दूरभाष पर बात की। उन्होंने संबंधित दोषी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को चिन्हित कर पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने तथा दोषियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे इस मामले को राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।
हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
लगातार लग रहे गंभीर आरोपों और विधायक के कड़े रुख के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया है। अस्पताल प्रबंधन ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
संपादकीय टिप्पणी: करोड़ों रुपये की लागत से बने इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ऐसी दुर्दशा प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। जब तक डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक गरीब जनता फाइलों और दावों के बीच ऐसे ही दम तोड़ती रहेगी।

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