🏹 हजारीबाग: हूल दिवस पर डीसी हेमन्त सती और एसपी अमन कुमार ने अमर वीर सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि; आदिवासी बलिदान को किया नमन
हजारीबाग: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज अमर शहीदों की याद में 30 जून को पूरे हजारीबाग जिले में ऐतिहासिक 'हूल दिवस' अत्यंत गरिमा और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने राष्ट्र की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर संताल नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर के हृदय स्थली माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी (PWD) चौक पर स्थापित ऐतिहासिक वीरता और सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक अमर शहीद सिदो और कान्हू की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें जिले के आला अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक ने भारी संख्या में भाग लिया।
🏛️ आला अधिकारियों ने प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
हूल दिवस के इस पावन अवसर पर हजारीबाग के उपायुक्त (DC) हेमन्त सती और पुलिस अधीक्षक (SP) अमन कुमार ने संयुक्त रूप से पीडब्ल्यूडी चौक पहुंचकर सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा में जिला प्रशासन के अन्य वरीय अधिकारी भी प्रमुखता से शामिल हुए। उप विकास आयुक्त (DDC) रिया सिंह, नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता, अपर समाहर्ता (AC) महेंद्र छोटन उरांव एवं सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) आदित्य पांडेय ने भी वीर शहीदों की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस को नमन किया। अधिकारियों के साथ-साथ इस अवसर पर जिले के कई स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और आमजन भी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में अमर शहीदों के जयकारे लगाए।
📜 ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाने वाले 'हूल विद्रोह' की याद
उपायुक्त हेमन्त सती ने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह और मीडिया को संबोधित करते हुए हूल विद्रोह के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सिदो-कान्हू ने 30 जून 1855 को ब्रिटिश शासन की क्रूरता और सामंती व्यवस्था के खिलाफ "हूल विद्रोह" का बिगुल फूंका था।
यह केवल एक साधारण विद्रोह नहीं था, बल्कि इसने पूरे आदिवासी समाज में अपने अधिकारों के प्रति एक अभूतपूर्व जागरूकता और स्वतंत्रता की अलख जगाई थी। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले हुआ यह आंदोलन अंग्रेजों की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी अध्याय है। तीर-धनुष के बल पर अंग्रेजी बंदूकों का सामना करने वाले इन वीरों का संघर्ष हमें आज भी अन्याय के खिलाफ अडिग रहने और अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने की अप्रतिम प्रेरणा देता है।
🤝 एकता और समरसता का संकल्प लेने का दिन
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि आज का यह ऐतिहासिक दिन हमें केवल अतीत को याद करने का ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक दृढ़ संकल्प लेने का भी विशेष अवसर प्रदान करता है। जिला प्रशासन की ओर से अपील की गई कि हम सभी को सामाजिक एकता, आपसी समरसता और स्वतंत्रता के उन लोकतांत्रिक मूल्यों को हमेशा बनाए रखना चाहिए, जिनके लिए इन महानायकों ने अपना खून बहाया था।
उपायुक्त ने कहा कि आज के आधुनिक समाज में यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो के उच्च आदर्शों को अपने दैनिक जीवन और कार्यप्रणाली में गहराई से आत्मसात करें।
📢 आदिवासी समाज के योगदान से जनमानस को कराया गया अवगत
हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा "हूल दिवस" को पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाते हुए नई पीढ़ी और आम जनमानस को देश की आजादी में आदिवासी समाज के अतुलनीय योगदान से अवगत कराने का यह एक सार्थक प्रयास रहा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह प्रण लिया कि शहीदों के सपनों का भारत और एक शोषणमुक्त समाज बनाने की दिशा में हर नागरिक अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएगा।

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