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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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संघर्ष कि आंखें नम हो जाएं: साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ीं रामगढ़ की कविता देवी, 10 मिनट की दौड़ 6 मिनट में पूरी कर पेश की जज्बे की मिसाल

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ऐसा संघर्ष कि रूह कांप जाए: साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ीं कविता देवी; 10 मिनट की दौड़ 6 मिनट में की पूरी, होमगार्ड भर्ती से संवारना चाहती हैं बच्चों का भविष्य

​नरेश सोनी, प्रधान संपादक

​रामगढ़ (न्यूज़ प्रहरी):

कुछ तस्वीरें केवल तस्वीरें नहीं होतीं, वे समाज के सामने एक ऐसा आईना रख देती हैं जिसमें लाचारी, गरीबी, संघर्ष और हिम्मत की दास्तान एक साथ दिखाई देती है। झारखंड के रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड की रहने वाली कविता देवी की एक ऐसी ही भावुक कर देने वाली तस्वीर और वीडियो इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। पैरों में जूते नहीं, बदन पर ट्रैक सूट नहीं, तन पर सिर्फ एक साधारण साड़ी और सामने तपती रेतीली जमीन। इन सबके बीच आंखों में एक सपना—होमगार्ड की नौकरी हासिल कर अपने अनाथ बच्चों और परिवार के भविष्य को संवारना।

Kavita Devi running barefoot in saree during physical training trial for home guard recruitment in Ramgarh

​पति गुजरात में करते थे मजदूरी, बीमारी ने छीन लिया सहारा

कविता के पति दीपक महतो गुजरात में रहकर मजदूरी करते थे और उसी कमाई से परिवार का भरण-पोषण होता था। अचानक गंभीर बीमारी की चपेट में आने के बाद परिवार ने अपनी क्षमता से बढ़कर इलाज पर खर्च किया, जिससे वे भारी कर्ज में डूब गए। तमाम प्रयासों के बावजूद दीपक को बचाया नहीं जा सका।

​पति के निधन के महज छह महीने बाद परिवार के जेठ की भी बीमारी से मौत हो गई। परिवार पर दोहरे वज्रपात के बाद कविता के कंधों पर दो छोटे बच्चों के भविष्य के साथ-साथ घर में बुजुर्ग सास-ससुर की पूरी जिम्मेदारी आ गई। पति के इलाज में चढ़ा भारी कर्ज आज भी उनके सिर पर है।

​सुबह 4 बजे उठती हैं, फिर दौड़ और उसके बाद ईंट भट्ठे में मजदूरी

परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय कविता ने संघर्ष का रास्ता चुना—होमगार्ड जवान बनने का संकल्प। वे प्रतिदिन तड़के करीब 4:00 बजे जागती हैं। घर-गृहस्थी का काम संभालने के साथ साड़ी पहनकर ही दौड़ का अभ्यास करती हैं और उसके बाद दिनभर ईंट भट्ठे पर पसीना बहाने निकल जाती हैं। दोपहर में जब अन्य मजदूर आराम करते हैं, तब भी कविता के मन में सिर्फ बच्चों की रोटी और कर्ज उतारने की चिंता सताती है।

​न जूते थे, न ट्रैक सूट... साड़ी में ही शुरू कर दी तैयारी

होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए कविता के पास स्पोर्ट्स शूज या ट्रैक सूट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने अपनी इस विपन्नता को कमजोरी नहीं बनने दिया और साड़ी पहनकर ही अभ्यास जारी रखा।

​अजय करमाली द्वारा संचालित 'एचएमटी फिजिकल एकेडमी' के प्रैक्टिस सेशन के दौरान जब बहाली का ट्रायल हुआ, तो वे उसी साड़ी में तेज धूप और गर्म रेतीली जमीन पर नंगे पांव दौड़ पड़ीं। जिस 1600 मीटर की दौड़ को पूरा करने के लिए अभ्यर्थियों को 10 मिनट का समय दिया गया था, कविता ने अपने अदम्य हौसले के बल पर उसे महज 6 मिनट में पूरा कर सभी को स्तब्ध कर दिया।

​अब मिले जूते और ट्रैक सूट, लेकिन असली मंजिल अभी बाकी

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद कुछ मददगार हाथ आगे बढ़े हैं। फिलहाल उन्हें अभ्यास के लिए जूते और ट्रैक सूट उपलब्ध करा दिए गए हैं ताकि वे बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। लेकिन कविता का कहना है कि उनकी असली मंजिल अभी दूर है। उनका एकमात्र लक्ष्य होमगार्ड की नौकरी पाना है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, वृद्ध सास-ससुर की सेवा और सिर पर लदे कर्ज से मुक्ति मिल सके।

​रामगढ़ जिले में 284 पदों पर होनी है होमगार्ड की बहाली

​रामगढ़ जिले में कुल 284 पदों पर होमगार्ड जवानों की बहाली प्रक्रिया चल रही है।

  • ​इनमें 50 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।

  • ​इसके अतिरिक्त 5 प्रतिशत पद तलाकशुदा और विधवा महिलाओं के लिए विशेष रूप से आरक्षित रखे गए हैं।

  • ​अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक जांच और दौड़ की औपचारिक प्रक्रिया आगामी 24 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी।

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