हजारीबाग: अगरिया असुर आदिम जनजाति विकास समिति का 26वां स्थापना दिवस संपन्न, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का दिखा अद्भुत संगम
हजारीबाग:
हजारीबाग के सरहुल मैदान स्थित धुमकुड़िया भवन में झारखंड अगरिया असुर आदिम जनजाति विकास समिति का 26वां स्थापना दिवस अत्यंत भव्य, गरिमामय और ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन में राज्य के विभिन्न जिलों से 500 से अधिक समाजबंधुओं ने शिरकत की, जिसने इस कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई प्रदान की। पूरे परिसर में पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का एक अद्भुत व मनमोहक संगम देखने को मिला।
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| "Agariya Asur Adim Janjati Vikas Samiti 26th Foundation Day Hazaribagh" |
पारंपरिक अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ से हुआ स्वागत
समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए [यहाँ विशिष्ट अतिथि/नेता का नाम लिखें] का समाज के वरिष्ठजनों और समिति के पदाधिकारियों द्वारा पारंपरिक अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर भव्य स्वागत व सम्मान किया गया।
'शिक्षा है समाज की उन्नति का सबसे सशक्त माध्यम'
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि [अतिथि का नाम] ने कहा कि अगरिया असुर आदिम जनजाति की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान हमारी अमूल्य धरोहर है। इसे सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा को समाज की उन्नति का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए युवाओं से संगठित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "जब समाज एकजुट होकर अपने अधिकारों, शिक्षा और विकास के लिए संकल्पित होता है, तब नई दिशा, नई सोच और नई पहचान स्वतः स्थापित होती है।"
26 वर्षों की संघर्षपूर्ण यात्रा पर डाला गया प्रकाश
कार्यक्रम के दौरान समिति के प्रदेश अध्यक्ष अनिल अगरिया ने संगठन की 26 वर्षों की लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा तथा अब तक की प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, संगठन के सचिव मुकेश कुमार अगरिया एवं कोषाध्यक्ष बिनोद अगरिया ने समाजहित में चल रही वर्तमान पहलों और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
पारंपरिक नृत्यों और लोकगीतों ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत समाज के कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य एवं लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने वहां उपस्थित सभी जनों को भावविभोर कर दिया।
यह गरिमामय आयोजन न केवल समिति के 26वें स्थापना दिवस का उत्सव था, बल्कि यह पूरे अगरिया असुर समाज की सामाजिक एकता, स्वाभिमान और निरंतर विकास के दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक बना। अंत में समाज की प्रगति, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के इस अभियान को और सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का
समापन हुआ।

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