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Editor: Naresh Prasad Soni
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गोंदलपुरा में कोयला खनन के विरोध में खतियानी परिवार का समर्थन, निजी कंपनियों और सरकार पर साधा निशाना

बड़कागांव के गोंदलपुरा में पिछले तीन वर्षों से कोयला खनन के खिलाफ चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन को खतियानी परिवार ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। महासचिव म
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गोंदलपुरा में कोयला खनन के विरोध में खतियानी परिवार का समर्थन, निजी कंपनियों और सरकार पर साधा निशाना

हजारीबाग: झारखंड के बड़कागांव प्रखंड स्थित गोंदलपुरा पंचायत में कोयला खनन के खिलाफ पिछले तीन वर्षों से चल रहे ग्रामीणों के आंदोलन को खतियानी परिवार ने अपना खुला समर्थन दिया है। इस मुद्दे को लेकर पुराना धरना स्थल के नजदीक अशोक राम की अध्यक्षता में खतियानी परिवार की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संगठन के केंद्रीय महासचिव मो. हकीम ने स्थानीय ग्रामीणों के संघर्ष की सराहना करते हुए कॉरपोरेट घरानों और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा।

"पुराना धरना स्थल के समीप आयोजित खतियानी परिवार की बैठक को संबोधित करते केंद्रीय महासचिव मो. हकीम व उपस्थित अन्य सदस्य।"

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय महासचिव मो. हकीम ने कहा कि जिन जन आंदोलनों के कारण आज जनता स्वतंत्र सांस ले पा रही है, उसी तर्ज पर गोंदलपुरा के महिला और पुरुष अपने अस्तित्व और जल, जंगल, जमीन को पूंजीपतियों से बचाने के लिए संघर्षरत हैं। स्थानीय ग्रामीण "जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे" के मूल नारे के साथ अपने संकल्प पर अडिग हैं और कृषि कार्य से जुड़े ये लोग अपनी आजीविका बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने देश के अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में खनन जैसी गतिविधियां न के बराबर हैं, जबकि उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे आदिवासी और मूलवासी बहुल प्रदेशों में ही बड़े पैमाने पर खनन कर विस्थापन का संकट पैदा किया जा रहा है।

खतियानी परिवार के महासचिव ने एक निजी कंपनी (अडानी ग्रुप) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी अपने धनबल के प्रभाव से बाहरी असामाजिक तत्वों को बुलाकर स्थानीय जनता के शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने का षड्यंत्र रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोले-भाले ग्रामीणों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जो कि अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड राज्य का निर्माण ही शोषण के विरुद्ध बड़े आंदोलनों का परिणाम था, लेकिन आज उसी राज्य में लोग अपने अधिकारों के लिए सड़क पर हैं।

राज्य सरकार की नीतियों पर भी निराशा व्यक्त करते हुए खतियानी परिवार ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण बिल को सख्ती से लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर यह अब तक हाथी के सफेद दांत के समान ही साबित हुआ है। खतियानी परिवार ने स्पष्ट किया कि वे शुरुआत से ही इन आंदोलनकारियों के साथ खड़े हैं और भविष्य में भी उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव सहयोग देते रहेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में मो. आशिक, विजय मिश्रा, मो. फखरुद्दीन, रामचंद्र राम मुखिया, अली जान मियां, सुरेश महतो, शौकत अली, अमर कुमार, सीता देवी, शंभू ठाकुर, प्रदीप प्रसाद मेहता और आशा देवी सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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