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Editor: Naresh Prasad Soni
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"मेरी शादी में तो राज्यपाल नहीं आए थे..." सांसद मनीष जायसवाल का यह अंदाज जीत रहा दिल, नवविवाहितों से वीडियो कॉल पर हुए भावुक

रामगढ़ में ऐतिहासिक सामूहिक विवाह के बाद सांसद मनीष जायसवाल ने नवदंपतियों से वीडियो कॉल पर की बात। कहा- 'मेरी शादी में भी राज्यपाल नहीं आए थे, आप खुशन
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"मेरी शादी में तो राज्यपाल नहीं आए थे..." सांसद मनीष जायसवाल का यह अंदाज जीत रहा दिल, नवविवाहितों से वीडियो कॉल पर हुए भावुक

(रामगढ़/हजारीबाग): राजनीति में अक्सर नेताओं को सख्त और औपचारिक देखा जाता है, लेकिन हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल पेश की है जो अब चर्चा का विषय बन गई है। रामगढ़ की धरती पर रविवार को संपन्न हुए ऐतिहासिक 'सांसद सामूहिक विवाह उत्सव-2026' के तुरंत बाद जब सांसद बजट सत्र में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हुए, तो उनका मन अपने क्षेत्र की उन बेटियों और दामादों में ही लगा रहा जिनका कन्यादान उन्होंने अभी-अभी किया था। सफर के दौरान ही उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को वीडियो कॉल किया और उनसे जो बातें कीं, उसने राजनीति से परे एक अभिभावक की तस्वीर पेश कर दी।

"मेरी शादी में तो राज्यपाल नहीं आए थे..."

​वीडियो कॉल पर नवदंपतियों से जुड़ते ही सांसद मनीष जायसवाल का अंदाज बिल्कुल बदल गया। उन्होंने दूल्हों से ठिठोली करते हुए बेहद मजाकिया लहजे में कहा कि आपकी शादी तो पूरी तरह 'शाही शादी' की तर्ज पर हुई है। उन्होंने हंसते हुए टिप्पणी की कि आपके विवाह में महामहिम राज्यपाल आए, मशहूर गायक मनोज तिवारी आए और करीब एक लाख लोगों ने आपको आशीर्वाद दिया, जबकि मेरी खुद की शादी में तो इनमें से कोई नहीं आया था। सांसद की इस सहजता और अपनापन ने नवविवाहित जोड़ों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। यह संवाद महज एक नेता और जनता के बीच का नहीं, बल्कि एक परिवार के मुखिया और बच्चों के बीच का संवाद नजर आया।

​हंसी- मजाक के बीच सांसद भावुक भी नजर आए। उन्होंने विवाह बंधन में बंधी बेटियों से बात करते हुए पूछा कि आयोजन में कोई कमी तो नहीं रह गई थी? उनका यह पूछना कि 'बेटी, सब ठीक है न?' उनकी संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है। खराब नेटवर्क के कारण कॉल कटने से पहले उन्होंने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि उनके द्वारा विदा की गई बेटियां खुश हैं। सांसद ने विदाई के वक्त भी कहा था कि उनका मकसद सिर्फ बेटियों के हाथ पीले करना नहीं, बल्कि जीवन भर उन्हें संबल देना है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि सांसद सामूहिक विवाह उत्सव महज एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक मानवीय यज्ञ है जिसमें वे हर बेटी को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।

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