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Editor: Naresh Prasad Soni
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बिहार की राजनीति में युगांत: नीतीश कुमार ने भरा राज्यसभा का पर्चा, 20 वर्षों के 'नीतीश युग' का हुआ अवसान

इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही बिहार में दो दशकों से चले आ रहे 'नीतीश युग' के अंत और उनके दिल्ली प्रस्थान की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। पढ़ें पूरी खबर।
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बिहार की राजनीति में युगांत: नीतीश कुमार ने भरा राज्यसभा का पर्चा, 20 वर्षों के 'नीतीश युग' का हुआ अवसान


पटना: बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक युगांतरकारी परिवर्तन देखने को मिला है। पिछले लगभग दो दशकों से बिहार की सत्ता के शीर्ष पर विराजमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति से विदाई लेते हुए राष्ट्रीय राजनीति ('दिल्ली दरबार') की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं।
"पटना में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष राज्यसभा के अभ्यर्थी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल करते और संविधान के प्रति सत्यनिष्ठा की शपथ लेते हुए नीतीश कुमार। उनके ठीक बगल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित हैं।"



उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में राज्यसभा के लिए अपना आधिकारिक नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। इस घटनाक्रम के साथ ही राज्य में उस 'नीतीश युग' का समापन हो गया है, जिसने बिहार की दशा और दिशा तय करने में एक अहम भूमिका निभाई थी।

वायरल वीडियो में गूंजा संकल्प

नामांकन कक्ष का एक वीडियो इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना है। वीडियो में नीतीश कुमार निर्वाचन अधिकारी को अपने दस्तावेज सौंपते हुए और वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान वे स्पष्ट शब्दों में अपने दायित्व का प्रतिज्ञान करते हुए कहते हैं—

"मैं नीतीश कुमार, जो राज्यसभा में स्थान भरने के लिए अभ्यर्थी के रूप में नाम निर्देशित हुआ हूँ, सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा और मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा।"

इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान उनके ठीक बगल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी इस राजनीतिक घटनाक्रम की गंभीरता और एनडीए (NDA) गठबंधन की भावी रणनीति की एकजुटता को प्रमाणित करती है।

एक युग का अवसान और भविष्य की रूपरेखा

साल 2005 से (कुछ संक्षिप्त अंतरालों को छोड़कर) लगातार मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार अब उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य के रूप में संसद में अपनी सेवाएं देंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम गठबंधन के भीतर एक सुविचारित रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उन्हें ससम्मान राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय किया जा रहा है। स्वयं नीतीश कुमार ने भी अपने समर्थकों को यह आश्वस्त किया है कि नई सरकार और बिहार के विकास में उनका निरंतर मार्गदर्शन बना रहेगा।

अब आगे क्या?

सुशासन बाबू के इस प्रस्थान के बाद अब बिहार के राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि राज्य के नेतृत्व की बागडोर अब किसके हाथों में सौंपी जाएगी। नई सरकार के गठन और नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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