Ranchi: डॉन बनने की चाहत में शराब दुकान पर की थी फायरिंग, मैकलुस्कीगंज हत्याकांड के आरोपी सहित 3 कुख्यात गिरफ्तार
Ranchi: रांची पुलिस ने अनगड़ा थाना क्षेत्र के गेतलसूद बाजार में एक शराब की दुकान पर फायरिंग करने के मामले का सफल उद्भेदन करते हुए तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
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| पुलिस के अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनगड़ा शराब दुकान फायरिंग और मैकलुस्कीगंज हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए। |
यह घटना 3 मार्च को होली से ठीक एक शाम पहले हुई थी। पुलिस ने इनके पास से अवैध हथियार और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।
शराब न मिलने से हुए थे आहत, रात में की फायरिंग
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले ये अपराधी शराब की दुकान पर गए थे और वहां मौजूद स्टाफ से शराब की मांग की थी। स्टाफ द्वारा शराब देने से इंकार करने पर वे आहत हो गए थे। इसी का बदला लेने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से उन्होंने रात में दुकान पर फायरिंग की और जाते-जाते एक शराब की बोतल भी अपने साथ ले गए।
SIT का गठन और पोल्ट्री फार्म से हुई गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने डीएसपी सिल्ली के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस टीम में अनगड़ा, टाटीसिलवे, सिकिदिरी और मुरी के थाना प्रभारियों को शामिल किया गया था। टीम ने लगातार छापेमारी की और अंततः अनगड़ा थाना क्षेत्र स्थित एक पोल्ट्री फार्म के पास से तीनों आरोपियों को दबोच लिया।
मैकलुस्कीगंज में विजय केसरी हत्याकांड में भी थे वांछित
गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
देव सिंह मुंडा: अनगड़ा का निवासी।
गौतम यादव: मैकलुस्कीगंज का निवासी।
भोलू सोनी: सिकिदिरी थाना क्षेत्र का निवासी।
पुलिस ने खुलासा किया कि देव सिंह मुंडा और गौतम यादव कुछ दिन पूर्व मैकलुस्कीगंज के बाजार टांड़ में हुई विजय केसरी की हत्या के मामले में भी मुख्य आरोपी थे और तब से फरार चल रहे थे। इन अपराधियों के पास से फायरिंग में इस्तेमाल किया गया एक सिक्सर, एक देसी कट्टा और 19 गोलियां बरामद की गई हैं।
मीडिया में फेमस होकर लेवी (रंगदारी) वसूलने का था प्लान
प्रेस वार्ता में पुलिस ने बताया कि ये अपराधी इलाके में अपना वर्चस्व कायम कर खुद को बड़े गैंगस्टर के रूप में स्थापित करना चाहते थे। इनका काम करने का तरीका यह था कि ये कोई भी घटना को अंजाम देने के बाद तुरंत उसकी सूचना मीडिया को देते थे, ताकि वे सुर्खियों में आ सकें। इस प्रसिद्धि और खौफ का फायदा उठाकर वे भविष्य में व्यवसायियों से लेवी (रंगदारी) वसूलना चाहते थे।
इन अपराधियों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। देव सिंह मुंडा के खिलाफ 9 मामले दर्ज हैं और वह 2015 से अपराध की दुनिया में है। वहीं, गौतम यादव पर 12 गंभीर मामले दर्ज हैं और वह 2016 से सक्रिय है। इन पर लूट, डकैती, चोरी, हत्या, आर्म्स एक्ट और रंगदारी जैसे कई गंभीर मामले पहले से चल रहे हैं।
Note: यह खबर रांची पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से प्राप्त वीडियो के आधार पर संकलित की गई है।

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