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Editor: Naresh Prasad Soni
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भगत सिंह का बलिदान युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा- मंत्री दीपिका पांडे

हजारीबाग में शहीद भगत सिंह का शहादत दिवस मनाया गया। मंत्री दीपिका पांडे ने उनके क्रांतिकारी जीवन और देशप्रेम पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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भगत सिंह का बलिदान युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा- मंत्री दीपिका पांडे
हजारीबाग जिला कांग्रेस कार्यालय में शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देतीं मंत्री दीपिका पांडे एवं उपस्थित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी।

हजारीबाग झारखंड: स्वाधीनता संग्राम के महानायक शहीद-ए-आजम भगत सिंह के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर आज हजारीबाग के जिला कांग्रेस कार्यालय 'कृष्ण बल्लभ आश्रम' में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम में झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं। उन्होंने भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके अदम्य साहस और वैचारिक क्रांति को याद किया।

बचपन से ही रगों में दौड़ता था राष्ट्रवाद

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडे ने कहा कि भगत सिंह का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहाँ देशभक्ति घुट्टी में मिली थी। बचपन में जब बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब भगत सिंह खेतों में बंदूकें बोने की बात करते थे ताकि अंग्रेजों को देश से बाहर निकाला जा सके। उनके हृदय में ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के विरुद्ध बचपन से ही गहरी घृणा और आक्रोश व्याप्त था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनके भीतर की उस अग्नि को ज्वाला में बदल दिया, जिसने अंततः साम्राज्यशाही की नींव हिला दी।

वैचारिक क्रांति और सशस्त्र विद्रोह का संगम

दीपिका पांडे ने भगत सिंह के राजनीतिक योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने केवल हथियारों के दम पर आजादी नहीं चाही, बल्कि वे एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना चाहते थे। 'हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ' (HSRA) की स्थापना इसी दिशा में एक बड़ा कदम था। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन था।

असेम्बली बम कांड का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि वह हमला किसी की जान लेने के लिए नहीं, बल्कि "बहरों को सुनाने" के लिए था। भगत सिंह और उनके साथियों ने भागने के बजाय स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी, ताकि वे अदालत को अपने विचारों के प्रचार का मंच बना सकें। उनकी इस कुर्बानी ने देश के कोने-कोने में इंकलाब की गूंज पैदा कर दी।

अंतिम क्षणों तक अटूट रहा हौसला

शहादत दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि 23 मार्च 1931 का वह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। उनकी फांसी ने पूरे भारत में वह लहर पैदा की जिससे ब्रिटिश शासन का अंत निश्चित हो गया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भगत सिंह के केवल शौर्य ही नहीं, बल्कि उनके अध्ययनशील स्वभाव और क्रांतिकारी विचारों को भी अपनाने की आवश्यकता है।

संगठनात्मक उपस्थिति और श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष सह मीडिया विभाग के जिला अध्यक्ष निसार खान ने की। उन्होंने शहीद भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने के संकल्प को दोहराया। इस गौरवमयी अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश उपाध्यक्ष भीम कुमार, सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह, प्रदेश सचिव अवधेश कुमार सिंह, बिनोद सिंह, और शशि मोहन सिंह ने भी अपने विचार रखे। इनके अलावा विजय कुमार यादव, आबिद अंसारी, और शैलेंद्र कुमार यादव ने भी अमर शहीदों को नमन किया।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस श्रद्धांजलि सभा में अशोक देव, विरेन्द्र कुमार सिंह, दिगम्बर प्रसाद मेहता, सुरजीत नागवाला, रजी अहमद, डॉ. प्रकाश कुमार, रणु कुशवाहा, बेबी देवी, कोमल कुमारी, राजू चौरसिया, सलीम रजा, अजय गुप्ता, नरेश गुप्ता, संजय गुप्ता, कृष्णदेव प्रसाद सिंह, मिथिलेश दुबे, साजिद अली खान, परवेज अहमद, गुड्डू सिंह, दिलीप कुमार रवि, नौशाद खान, बाबर अंसारी, सदरूल होदा, सुनिल अग्रवाल सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

निष्कर्ष आधुनिक भारत में भगत सिंह की प्रासंगिकता

आज के डिजिटल और तेजी से बदलते युग में भी भगत सिंह के विचार प्रासंगिक हैं। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्रता की रक्षा करना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाना ही लोकतंत्र की असली जीत है। हजारीबाग कांग्रेस कार्यालय में आयोजित यह शहादत दिवस केवल एक रस्म नहीं, बल्कि उन मूल्यों को पुनः जीवित करने का प्रयास था जिसके लिए शहीदों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

Naresh Soni Editor in Chief (newsprahari.in)

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