वीर कुंवर सिंह की जयंती पर हजारीबाग में उमड़ा जनसैलाब, मुन्ना सिंह ने माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि
1857 के महानायक के आदर्श आज भी प्रासंगिक, राष्ट्र निर्माण और जनसेवा का लिया गया संकल्प
हजारीबाग: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक वीर कुंवर सिंह की जयंती के अवसर पर गुरुवार को हजारीबाग में गौरवपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के सर्किट हाउस स्थित उनकी प्रतिमा पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों और स्थानीय नागरिकों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस गरिमामयी अवसर पर पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने मुख्य रूप से उपस्थित होकर महानायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके योगदान को याद किया।
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| हजारीबाग में गौरवपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन |
साहस और अटूट राष्ट्रभक्ति की मिसाल
माल्यार्पण के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुन्ना सिंह ने कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह का व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के उन स्वर्णिम पृष्ठों में दर्ज है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि 80 वर्ष की वृद्धावस्था में भी जिस अदम्य साहस और युद्ध कौशल के साथ उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी, वह अद्वितीय है। मुन्ना सिंह ने उनके जीवन को साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का पर्याय बताया।
वर्तमान समाज में आदर्शों की प्रासंगिकता
मुन्ना सिंह ने वीर कुंवर सिंह के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा, "आज के आधुनिक युग में भी उनके समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के मूल्य पूरी तरह प्रासंगिक हैं। यदि हमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास और न्याय पहुँचाना है, तो हमें उनके द्वारा दिखाए गए सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलना होगा।" उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल इतिहास न पढ़ें, बल्कि उन महानायकों के चरित्र को अपने जीवन में आत्मसात करें।
सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजन केवल औपचारिक नहीं होने चाहिए। यह हमारे लिए आत्ममंथन और संकल्प लेने का दिन है। जनसेवा, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करना ही वीर कुंवर सिंह जैसे महानायकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित नागरिकों ने भी महानायक के पदचिह्नों पर चलने और देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण रखने का सामूहिक संकल्प लिया। इस दौरान पूरा परिसर "वीर कुंवर सिंह अमर रहें" के नारों से गुंजायमान रहा।

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