झारखंड में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार: हजारीबाग में पत्रकार की पिटाई पर भड़का आक्रोश, उग्र आंदोलन की चेतावनी
भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ ने स्वास्थ्य मंत्री के कथित गुर्गों पर लगाया आरोप; सरकार से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग।
नरेश सोनी न्यूज़ प्रहरी प्रधान सम्पादक.
राँची/हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल के पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के कथित गुर्गों द्वारा पत्रकार की बेरहमी से पिटाई की गई। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश के पत्रकार संगठनों में भारी रोष व्याप्त है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर उबाल देखा जा रहा है।
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| SWASTH MANTRI IRFAN ANSARI |
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र गिरी एवं रांची जिला अध्यक्ष जावेद अख्तर ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा और कायराना प्रहार है। संघ का कहना है कि सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिशें झारखंड जैसे लोकतांत्रिक राज्य में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
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| MANTRI KE GURGE DWARA PATRAKAAR SE SATH MARPIT KARTE |
सत्ता के संरक्षण का आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग संघ ने स्पष्ट तौर पर राज्य सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पत्रकारों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में न्याय की उम्मीद धूमिल होने लगती है। धर्मेंद्र गिरी ने कहा, "यदि सत्ता के रसूख का इस्तेमाल पत्रकारों को डराने-धमकाने के लिए किया जाएगा, तो पूरा पत्रकार समाज एकजुट होकर इसका मुंहतोड़ जवाब देगा।"
संघ की प्रमुख मांगें:
घटना में शामिल सभी दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी।
पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा प्रदान करना और इलाज की समुचित व्यवस्था।
प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए 'पत्रकार सुरक्षा कानून' की दिशा में ठोस कदम।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी पत्रकार संघ ने सरकार और प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि शीघ्र ही दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा और इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।


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