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Editor: Naresh Prasad Soni
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गिद्धी चेकपोस्ट पर दहशत फैलाने के लिए हुई फायरिंग का खुलासा: हजारीबाग पुलिस की एसआईटी ने राहुल दुबे गैंग के मोहम्मद वारिस को दबोचा; पिस्टल और कारतूस बरामद, दो फरार

हजारीबाग पुलिस ने गिद्धी फायरिंग कांड का किया खुलासा। राहुल दुबे गैंग का मोहम्मद वारिस पिस्टल के साथ गिरफ्तार। पढ़ें इन-डेप्थ रिपोर्ट।
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हजारीबाग पुलिस एक्शन: गिद्धी थाना कांड में राहुल दुबे गिरोह का कुख्यात मोहम्मद वारिस गिरफ्तार; सात संगीन मामलों का है आपराधिक इतिहास, अमित आनंद के नेतृत्व में एसआईटी को मिली सफलता

"गिरफ्तार अभियुक्त ने कुबूला फायरिंग का जुर्म, उसकी निशानदेही पर देशी पिस्टल और कारतूस जब्त, अन्य दो फरार अपराधियों की तलाश तेज"— हजारीबाग पुलिस

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)

  • समाचार स्रोत (Source): पुलिस अधीक्षक कार्यालय (हजारीबाग) सह गिद्धी थाना प्रभाग

हजारीबाग: हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक के कुशल निर्देशानुसार गठित विशेष जांच दल (SIT) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस टीम ने गिद्धी थाना क्षेत्र अंतर्गत गिद्धी सी चेकपोस्ट पर दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई ताबड़तोड़ फायरिंग के मामले का सफल उद्भेदन कर दिया है। पुलिस ने इस कांड में शामिल कुख्यात राहुल दुबे गिरोह (Rahul Dubey Gang) के एक बेहद सक्रिय और शातिर सदस्य को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार अपराधी की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल किया गया अवैध हथियार और जिंदा कारतूस भी विधिवत बरामद कर लिया गया है।

📊 हिस्ट्रीशीटर अपराधी: बड़कागांव और कटकमदाग का शातिर अपराधी है वारिस; रंगदारी, डकैती की योजना और जानलेवा हमले के 7 मामलों में पहले से था नामजद।
 

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, बीते दिनांक 02 जून 2026 को गिद्धी थाना अंतर्गत गिद्धी सी चेकपोस्ट पर एक बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर दो अपराधी पहुंचे थे। उन अपराधियों ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल कायम करने के इरादे से अचानक अंधाधुंध गोलीबारी (फायरिंग) की थी। इस दुस्साहसिक घटना के बाद गिद्धी थाना में कांड संख्या- 13/26, दिनांक 03 जून 2026 दर्ज किया गया था। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा- 109(1)/3(5) बीएनएस एवं 27 आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया था।

एसपी ने बनाई एसआईटी, गुप्त सूचना पर घर से दबोचा गया अपराधी

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए कांड के उद्भेदन और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। अनुसंधान के क्रम में पुलिस टीम को एक पुख्ता गुप्त सूचना प्राप्त हुई। इसी आधार पर एसआईटी ने छापेमारी कर राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य मोहम्मद वारिस को उसके घर से संदेह के आधार पर हिरासत में लिया। पुलिस द्वारा की गई कड़ी और आवश्यक पूछताछ के दौरान मोहम्मद वारिस ने गिद्धी सी चेकपोस्ट पर दहशत फैलाने के लिए गोली फायरिंग करने के इस गंभीर अपराध में अपनी सीधी संलिप्तता को स्वीकार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयोग किया गया 7.62 mm का एक देशी पिस्टल और 7.62 mm का दो जिंदा कारतूस विधिवत जब्त कर लिया। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि इस वारदात में मोहम्मद वारिस के अलावा दो अन्य अपराधी भी शामिल थे, जो वर्तमान में फरार हैं और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त का पूरा विवरण

  • नाम व उम्र: मोहम्मद वारिस (उम्र- 22 वर्ष)

  • पिता का नाम: मोहम्मद मुस्तकिम

  • पता: साकिन- पुन्दोल (चंदोल), थाना- बड़कागांव, जिला- हजारीबाग

अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास (Criminal History)

गिरफ्तार अभियुक्त मोहम्मद वारिस का पुराना और बेहद संगीन आपराधिक इतिहास रहा है। वह बड़कागांव, कटकमदाग और गिद्धी थाना क्षेत्रों में दर्जनों गंभीर मामलों में नामजद रहा है:

  1. कटकमदाग थाना कांड संख्या- 92/2020: धारा- 25(1-B)a/26/35 आर्म्स एक्ट एवं 17 सीएलए एक्ट।

  2. बड़कागांव थाना कांड संख्या- 100/2020: धारा- 385/387/504/506/452/34 भादवि (रंगदारी व धमकी)।

  3. बड़कागांव थाना कांड संख्या- 258/2021: धारा- 399/402/120बी भादवि एवं 25(1-B)a/26/35 आर्म्स एक्ट (डकैती की योजना)।

  4. बड़कागांव थाना कांड संख्या- 255/2021: धारा- 385/387/307/34 भादवि एवं 27 आर्म्स एक्ट (जानलेवा हमला व रंगदारी)।

  5. बड़कागांव (उरीमारी) थाना कांड संख्या- 73/25: धारा- 111(2) बीएनएस एवं 25(1-B)a/26/35 आर्म्स एक्ट।

  6. बड़कागांव (उरीमारी) थाना कांड संख्या- 49/25: धारा- 308(4)/308(5)/111(2) बीएनएस।

  7. गिद्धी थाना कांड संख्या- 111/24: धारा- 308(4)/308(5)/111(2) बीएनएस।

एसआईटी (SIT) टीम में शामिल जांबाज पुलिस अधिकारी

इस महत्वपूर्ण और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली विशेष टीम में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी और बल शामिल थे:

  • अमित आनंद (भापुसे): अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), बड़कागांव, हजारीबाग (टीम नेतृत्वकर्ता)

  • मो0 शाहिद रजा: पुलिस निरीक्षक (Inspector), बड़कागांव अंचल

  • मो0 इकबाल हुसैन: थाना प्रभारी (SI), गिद्धी थाना

  • रथु उरांव: ओपी प्रभारी (SI), उरीमारी ओपी

  • रमेश चंद्र हजाम: पुलिस अवर निरीक्षक (SI), गिद्धी थाना

  • दामुराम बोयपाई: पुलिस अवर निरीक्षक (SI), गिद्धी थाना

  • चंदन उरांव: सहायक अवर निरीक्षक (ASI), गिद्धी थाना

  • गिद्धी थाना एवं उरीमारी ओपी के सशस्त्र बल और 08 गृह रक्षक (होमगार्ड) के जवान।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (BNS Laws & Arms Act Awareness)

📌 जानिए क्या कहती हैं नए कानून की धाराएं और आर्म्स एक्ट के कड़े प्रावधान?

  • धारा 111 भारतीय न्याय संहिता (BNS): नए कानून (BNS) के तहत संगठित अपराध (Organized Crime) और गिरोह बनाकर दहशत या रंगदारी फैलाने के मामलों में धारा 111 के तहत बेहद सख्त और गैर-जमानती सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें उम्रकैद तक हो सकती है।

  • 27 आर्म्स एक्ट: बिना वैध लाइसेंस के अवैध हथियारों (जैसे देशी कट्टा, पिस्टल) का इस्तेमाल करने या गोलीबारी कर दहशत फैलाने पर आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत कठोर कारावास की सजा दी जाती है।

  • रंगदारी और गिरोहबाजी पर पुलिस की नीति: झारखंड पुलिस अपराधियों और संगठित गिरोहों (जैसे राहुल दुबे गिरोह) के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। किसी भी गिरोह को संरक्षण देना या उनके नाम पर रंगदारी मांगना कानूनन संगीन अपराध है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: हजारीबाग में संगठित अपराधियों पर पुलिस का बढ़ता शिकंजा (Editorial)

गिद्धी चेकपोस्ट फायरिंग कांड का महज 4 दिनों में खुलासा: पुलिस की मुस्तैदी की बड़ी मिसाल 02 जून को गिद्धी सी चेकपोस्ट पर दिनदहाड़े बुलेट से आकर दहशत फैलाने के लिए की गई फायरिंग ने हजारीबाग पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी थी। लेकिन तारीफ करनी होगी बड़कागांव एसडीओपी अमित आनंद (IPS) और उनकी विशेष एसआईटी टीम की, जिन्होंने महज चार दिनों के भीतर न सिर्फ राहुल दुबे गैंग के सक्रिय गुर्गे मोहम्मद वारिस को दबोचा, बल्कि घटना में प्रयुक्त हथियार भी रिकवर कर लिया। 22 साल की उम्र में मोहम्मद वारिस का सात गंभीर कांडों में शामिल होना यह दर्शाता है कि किस तरह युवा वर्ग संगठित अपराध और गैंगस्टरों के चंगुल में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है। बड़कागांव और उरीमारी जैसे कोयलांचल क्षेत्रों में लेवी और रंगदारी के लिए गिरोहों द्वारा अक्सर ऐसी फायरिंग की घटनाएं की जाती हैं। हजारीबाग पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई व्यापारियों और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करेगी। अब पुलिस को चाहिए कि वह गिरोह के सरगना राहुल दुबे और इस कांड में फरार चल रहे अन्य दो अपराधियों को भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजे, ताकि कोयलांचल में अमन-चैन मुकम्मल हो सके।

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