हजारीबाग सिविल कोर्ट में मासिक लोक अदालत का आयोजन: 30 मामलों का हुआ ऑन-द-स्पॉट निष्पादन, 1.51 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर बनी सहमति
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):
आम जनता को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय सुलभ कराने के उद्देश्य से शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर में मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के तत्वावधान में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 30 मामलों का दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से सौहार्दपूर्ण निष्पादन किया गया। इस दौरान पक्षकारों के मध्य कुल 1 करोड़ 51 लाख 14 हजार 306 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी।
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| Bench of judicial officers resolving cases during monthly Lok Adalat at Civil Court campus in Hazaribagh |
बिजली विभाग के सर्वाधिक 15 मामलों का निपटारा
लोक अदालत में सबसे अधिक मामले बिजली विभाग से जुड़े रहे। कुल 15 बिजली विवाद से जुड़े मामलों का निष्पादन करते हुए 1 लाख 54 हजार रुपये पर समझौता कराया गया। इसके साथ ही मोटर वाहन दुर्घटना दावा (एमएसीटी) के 02 अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें 86 लाख 50 हजार रुपये की दावा राशि पर पक्षकारों के बीच सहमति बनी।
वहीं एनआई एक्ट (चेक बाउंस) से संबंधित 06 मामलों में 62 लाख 41 हजार 56 रुपये, बैंक रिकवरी के 03 मामलों में 29 हजार 250 रुपये पर पक्षकारों के बीच समझौता हुआ। इसके अतिरिक्त सुलहनीय आपराधिक श्रेणी के 04 मुकदमों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया गया, जिसके तहत 40 हजार रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा कराई गई।
अंतिम व्यक्ति तक विधिक सहायता पहुंचाना प्राथमिकता: कुमार विपुल
डालसा सचिव कुमार विपुल ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा के निर्देशानुसार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विधिक सहायता पहुंचाने और मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए प्राधिकार निरंतर सक्रिय है। इसी कड़ी में न्याय सदन भवन में मध्यस्थता के जरिए मुकदमों के त्वरित समाधान को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित मध्यस्थों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मासिक लोक अदालत के सफल संचालन में न्यायिक पदाधिकारियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, हजारीबाग बार एसोसिएशन के सम्मानित अधिवक्ताओं तथा व्यवहार न्यायालय कर्मियों का सराहनीय योगदान रहा।

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