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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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विस्थापन नीति और एसआईआर की दोहरी मार झेल रही जनता: खतियानी परिवार ने उठाई आवाज, एसआईआर की समय सीमा दो माह बढ़ाने की मांग

हजारीबाग में खतियानी परिवार की बैठक में उठा विस्थापन और एसआईआर का मुद्दा। बड़कागांव, केरेडारी और टंडवा के विस्थापितों को राहत देने की मांग।
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विस्थापन और एसआईआर की दोहरी मार से बेहाल जनता: खतियानी परिवार की बैठक में उठी आवाज, प्रक्रिया की समय सीमा दो माह बढ़ाने की मांग

नरेश सोनी, प्रधान संपादक

हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):

खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक पुराना धरना स्थल के समीप अशोक राम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से झारखंड में विस्थापन नीति की विसंगतियों और एसआईआर (SIR) की अनिवार्य प्रक्रिया के कारण विस्थापित परिवारों के समक्ष उत्पन्न हो रही गंभीर व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

Khatiyani Parivar members holding weekly meeting regarding displacement and SIR issues near old dharna sthal in Hazaribagh

विस्थापन नीति और एसआईआर दोनों दिशाहीन: मोहम्मद हकीम

बैठक में अपने विचार रखते हुए खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने कहा कि आज पूरे झारखंड में विस्थापन और एसआईआर की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। केंद्र सरकार की विस्थापन नीति और एसआईआर की प्रक्रिया दोनों ही दिशाहीन साबित हो रही हैं।

​उन्होंने कहा कि विस्थापन के कारण लोगों को अपने पैतृक गांव और घर छोड़ने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जहां भी वे शरण ले रहे हैं, वहां एसआईआर की जटिल प्रक्रिया उनका पीछा नहीं छोड़ रही। इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच पिसकर आम जनता भटकने को मजबूर है। यदि विस्थापन पर रोक लगे और विस्थापित परिवारों को स्थायी समाधान मिले, तो जनता इस तरह की परेशानियों से बच सकती है।

बड़कागांव, केरेडारी और टंडवा विस्थापन से सबसे ज्यादा ग्रस्त: मेघनाथ प्रसाद मेहता

बैठक को संबोधित करते हुए मेघनाथ प्रसाद मेहता ने कहा कि हजारीबाग जिले का बड़कागांव व केरेडारी तथा चतरा जिले का टंडवा क्षेत्र विस्थापन के दर्द से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां के परिवार अपनी आजीविका और आवास खोकर जहां-तहां शरण लेकर जीवन यापन कर रहे हैं।

​उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार द्वारा मात्र एक माह के भीतर एसआईआर प्रक्रिया पूर्ण करने का फरमान जारी किया गया है, जो विस्थापित परिवारों के लिए इस तय सीमा में संभव नहीं है। विस्थापन के कारण बेघर हुए लोगों की कठिनाइयों को देखते हुए सरकार को अविलंब इस समय सीमा में विस्तार करना चाहिए।

फॉर्म की जटिलताओं के कारण छंट रहे नाम: बोधी साहू

बोधी साहू ने कहा कि एसआईआर फॉर्म में निश्चित खाता और प्लॉट संख्या दर्ज करने की अनिवार्यता रखी गई है। विस्थापन की स्थिति में नई जगह बसने से पहले लोग खाता और प्लॉट का विवरण कैसे दे सकते हैं? इसी तकनीकी पेंच के कारण बड़ी संख्या में विस्थापितों के नाम प्रक्रिया से छूट रहे हैं।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर का महत्व केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अभाव में नागरिकों के कई महत्वपूर्ण सामाजिक व प्रशासनिक कार्य बाधित होते हैं। खतियानी परिवार ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया की समय सीमा को कम से कम दो महीने के लिए बढ़ाया जाए ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे।

बैठक में ये सदस्य रहे उपस्थित

इस बैठक में मुख्य रूप से रामावतार भगत, सुनीता कश्यप, राधा देवी, मुख्तार अंसारी, सुरेश महतो, मोहम्मद आशिक, तनवीर अख्तर, किशोरी प्रसाद मेहता, मोहम्मद फखरुद्दीन, विजय मिश्रा, प्रदीप कुमार मेहता, अली जान मियां, अमर कुमार गुप्ता, शोएब अंसारी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

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