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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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टाटीझरिया के दूधमटिया में 6 और 7 अक्टूबर को सजेगा ऐतिहासिक पर्यावरण मेला, प्रभात फेरी और साइकिल रैली से होगा शुभारंभ

टाटीझरिया के दूधमटिया में 6-7 अक्टूबर को 30वां पर्यावरण मेला। वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास कुमार उज्ज्वल की अध्यक्षता में हुई बैठक।
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टाटीझरिया के दूधमटिया में 6 और 7 अक्टूबर को आयोजित होगा ऐतिहासिक पर्यावरण मेला: जिला पर्यावरण समिति की बैठक में बनी रूपरेखा

नरेश सोनी, प्रधान संपादक

हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):

हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) विकास कुमार उज्ज्वल की अध्यक्षता में आगामी दूधमटिया पर्यावरण मेला के सफल व सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर समाहरणालय में जिला पर्यावरण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में मेले के भव्य संचालन, विभिन्न विभागों के दायित्व निर्धारण और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को लेकर विस्तार से कार्ययोजना तैयार की गई।

District Environment Committee meeting chaired by DFO Vikas Kumar Ujjwal for Dudhmatia Paryavaran Mela

6 व 7 अक्टूबर को होगा आयोजन, प्रभात फेरी और साइकिल रैली से आगाज

वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 6 एवं 7 अक्टूबर को टाटीझरिया प्रखंड अंतर्गत दूधमटिया गांव में दो दिवसीय पर्यावरण मेला आयोजित किया जाएगा। मेले के पहले दिन 6 अक्टूबर को स्कूली विद्यार्थियों द्वारा जागरूकता प्रभात फेरी निकाली जाएगी तथा जनभागीदारी से एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन होगा। साइकिल रैली के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए ट्रैफिक पुलिस को मार्ग प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया है।

30 वर्षों की अनूठी परंपरा: पेड़ों को रक्षाबंधन बांधकर संरक्षण का संदेश

बैठक में उपस्थित पर्यावरणविदों ने अपने अनुभव साझा करते हुए रेखांकित किया कि दूधमटिया पर्यावरण मेला पिछले लगभग 30 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। यह मेला जैव विविधता संरक्षण, वनों की सुरक्षा और पेड़ों को रक्षा सूत्र (रक्षाबंधन) बांधकर उनकी रक्षा करने की जनपरंपरा के माध्यम से पूरे राज्य को पर्यावरण चेतना का संदेश देता रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं और विभागीय जिम्मेदारियां

मेले में दूर-दराज से आने वाले पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए विभिन्न विभागों को निर्देश दिए गए हैं:

  • पेयजल व स्वच्छता: नगर निगम को मेला परिसर में पर्याप्त पेयजल टैंकर और अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था करने का जिम्मा सौंपा गया।
  • स्वास्थ्य सेवाएं: स्वास्थ्य विभाग को आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आयोजन स्थल पर एम्बुलेंस और चिकित्सकों की मेडिकल टीम तैनात रखने का निर्देश दिया गया।
  • संस्थानों की सहभागिता: एनटीपीसी, एनएचएआई, सीसीएल सहित अन्य प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक संगठनों को समन्वय स्थापित कर सक्रिय सहभागिता निभाने को कहा गया।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई।

​बैठक में मुख्य रूप से वन्यप्राणी प्रमंडल पदाधिकारी सूरज कुमार, विभिन्न विभागों के नोडल पदाधिकारी, स्थानीय पर्यावरणविद, संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि एवं जिला पर्यावरण समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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