हजारीबाग बना राष्ट्रीय शतरंज का केंद्र: ऑल इंडिया फाइड रेटिंग प्रतियोगिता का भव्य समापन, अभिनव सिंह बने चैंपियन
नौ दिवसीय राष्ट्रीय शतरंज महाकुंभ में देशभर के 668 खिलाड़ियों ने दिखाया दम; विजेता अभिनव को मिला 50 हजार नकद व ट्रॉफी, अंडर-1800 वर्ग में सजी बाजियां।
हजारीबाग: हजारीबाग डिस्ट्रिक्ट चेस एसोसिएशन (HDCA) के तत्वावधान में तथा ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) एवं ऑल झारखंड चेस एसोसिएशन (AJCA) की आधिकारिक अनुमति से आयोजित एचडीसीए ऑल इंडिया फाइड रेटिंग क्लासिकल शतरंज प्रतियोगिता 2026 का रविवार को भव्य समापन हो गया। नौ दिनों तक चले इस राष्ट्रीय शतरंज महाकुंभ में देशभर से आए शातिरों ने अपने खेल कौशल, दिमागी रणनीति और धैर्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
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प्रतियोगिता के दोनों चरणों को मिलाकर कुल 668 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पहले सत्र में 272 तथा दूसरे सत्र में 396 खिलाड़ियों ने भाग लेकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। प्रतियोगिता का दूसरा चरण विशेष रूप से 1800 से कम फाइड रेटिंग (अंडर-1800) खिलाड़ियों के लिए आयोजित किया गया था, जिससे उभरती हुई खेल प्रतिभाओं को अपनी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग सुधारने का बड़ा मंच मिला।
विजेताओं पर हुई नकद पुरस्कारों की बौछार: टॉप-3 रैंकर
रविवार को नौवें राउंड की समाप्ति के बाद दोपहर करीब 1:30 बजे आयोजित समापन समारोह में बार एसोसिएशन के सचिव सुमन कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम निदेशक करण जायसवाल, संघ अध्यक्ष विजय कुमार सिंह और सचिव मनमीत अकेला ने विजेताओं के बीच कुल 37 श्रेणियों में ट्रॉफी एवं नकद पुरस्कारों का वितरण किया:
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| Mukhya Note. |
विभिन्न विशेष श्रेणियों के विजेताओं की सूची:
👩तरंज बेस्ट फीमेल श्रेणी: अदीबा उल्लाह (बिहार) प्रथम, अनन्या सामंता द्वितीय, प्रेरणा घोष तृतीय।
🏡 बेस्ट हजारीबाग खिलाड़ी: पवन कुमार वर्मा प्रथम, ऋषभ कुमार द्वितीय, अयान उत्कर्ष तृतीय।
👴 बेस्ट वेटरन (55+ वर्ग): गौतम डे प्रथम, कुमार अस्विनी द्वितीय, सह अमोद कुमार तृतीय।
जूनियर वर्ग (बॉयज़ एंड गर्ल्स) के विजेता:
🎯 अंडर-15 वर्ग: समनावय पाल (बॉयज़) प्रथम | अनिशा चक्रवर्ती (गर्ल्स) प्रथम, राज मणि द्वितीय।
🎯 अंडर-13 वर्ग: दिव्यंश बारिक (बॉयज़) प्रथम, एआईएम श्रेयान मुखर्जी द्वितीय | वन्या श्रीवास्तव (गर्ल्स) प्रथम, मोहुलरेनु रॉय द्वितीय।
🎯 अंडर-11 वर्ग: प्यांशु नाथ (बॉयज़) प्रथम, विवान बसाक द्वितीय | श्रेष्टा शर्मा (गर्ल्स) प्रथम, नव्या जैन द्वितीय।
🎯 अंडर-09 वर्ग: शार्नव रॉय (बॉयज़) प्रथम, प्रखर सिंह द्वितीय | साईआस्था सिंह (गर्ल्स) प्रथम, स्वास्तिका प्रजापति द्वितीय।
🎯 अंडर-07 वर्ग: सर्वम समर्थ (बॉयज़) प्रथम, प्रियंश आद्विक द्वितीय | स्वस्तिश्री सतपथी (गर्ल्स) प्रथम, उर्वी रॉय द्वितीय।
📈 ग्रोइंग श्रेणी: सन्निधान पाल (बॉयज़) प्रथम | वेदांशी राणा (गर्ल्स) प्रथम।
🌟 स्पेशल प्लेयर अवार्ड: ईशान पाठक एवं अविका सिंह को उनकी विशेष खेल भावना के लिए प्रदान किया गया।
हजारीबाग की पहचान अब राष्ट्रीय स्तर पर: अतिथि व आयोजक
समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सुमन कुमार सिंह ने कहा कि हजारीबाग में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। ऐसे आयोजन युवाओं को बौद्धिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम निदेशक करण जायसवाल ने इसे हजारीबाग के खेल इतिहास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि आने वाले समय में यहाँ इससे भी बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन कराए जाएंगे। संघ सचिव मनमीत अकेला ने खिलाड़ियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य हजारीबाग को राष्ट्रीय शतरंज मानचित्र पर स्थापित करना था, जो पूरी तरह सफल रहा। प्रतियोगिता को सफल बनाने में मुख्य निर्णायक विशाल मिंज, सहसचिव बृजेश कुमार, सुमित जायसवाल, कोषाध्यक्ष राजन शाह एवं कुश पांडे सहित पूरी आयोजन समिति का सराहनीय योगदान रहा।
✍️ शॉर्ट सम्पादकीय (Short Editorial):
शीर्षक: हजारीबाग के खेल इतिहास में 'शह और मात' का नया अध्याय
हजारीबाग डिस्ट्रिक्ट चेस एसोसिएशन (HDCA) द्वारा आयोजित ऑल इंडिया फाइड रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता का सफल समापन केवल एक खेल आयोजन की समाप्ति नहीं है, बल्कि यह इस शहर के राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरने की कहानी है। दो चरणों में देशभर के 668 खिलाड़ियों का एक छत के नीचे जुटना और नौ दिनों तक दिमागी बिसात पर रणनीतियों का लोहा मनवाना यह साबित करता है कि हजारीबाग बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के लिए पूरी तरह परिपक्व हो चुका है। झारखंड के ही होनहार खिलाड़ी अभिनव सिंह का चैंपियन बनना स्थानीय स्तर पर चेस के प्रति युवाओं के बढ़ते क्रेज का एक बेहद सुखद और सकारात्मक संकेत है।
शतरंज जैसे बौद्धिक खेल को अक्सर महानगरों तक ही सीमित माना जाता रहा है, लेकिन अंडर-1800 रेटिंग के खिलाड़ियों को ऐसा मंच देकर आयोजकों ने जमीनी स्तर की उन प्रतिभाओं को सींचने का काम किया है जिन्हें आगे बढ़ने के मौके कम मिलते हैं। ऐसे दौर में जब युवा पीढ़ी का अधिकांश समय डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया के आभासी जाल में बीत रहा है, शतरंज जैसे एकाग्रता, अनुशासन और धैर्य की मांग करने वाले खेल का प्रमोट होना समाज के लिए संजीवनी जैसा है। बहरहाल, करण जायसवाल और मनमीत अकेला की टीम ने इस आयोजन को जिस भव्यता के साथ संपन्न कराया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। अब जिम्मेदारी राज्य सरकार और खेल विभाग की है कि वे हजारीबाग में चेस की एक स्थायी अकादमी (Chess Academy) की नींव रखें, ताकि यहाँ की माटी से भविष्य के 'ग्रैंडमास्टर' निकल सकें।

