🏛️ टाटीझरिया: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच 108 एम्बुलेंस सेवा जल्द होगी बहाल; सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर प्रतिनिधि ने कंपनी को चेताया, डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर का छलका दर्द
टाटीझरिया (हजारीबाग): एनएच-522 पर स्थित और आए दिन होने वाली भीषण सड़क दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र में पिछले एक महीने से ठप पड़ी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा को लेकर एक बड़ा विधिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप सामने आया है। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल के कड़े रुख और विशेष निर्देश के बाद क्षेत्र में बंद पड़ी 108 एम्बुलेंस सेवा को आगामी दो दिनों के भीतर दोबारा सुचारु करने का ठोस भरोसा मिला है। पिछले करीब एक महीने से तकनीकी खराबी के नाम पर इस महत्वपूर्ण सरकारी सेवा को लावारिस छोड़ दिया गया था, जिससे पूरा प्रखंड क्षेत्र एम्बुलेंस विहीन हो गया था और गंभीर मरीजों सहित सड़क हादसों के शिकार होने वाले राहगीरों को समय पर इलाज न मिलने के कारण अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही थी। मामले की गंभीरता और जनता की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए सांसद ने इसे सीधे संज्ञान में लिया है।
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🏬 सांसद के निर्देश पर मीडिया प्रतिनिधि की त्वरित कार्रवाई; डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर को अविलंब सेवा शुरू करने की दी गई कड़ी चेतावनी
इस पूरे जनहित के मामले पर तत्परता दिखाते हुए सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर उनके मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने सीधे प्रशासनिक और विधिक मोर्चे पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने 108 एम्बुलेंस सेवा के हजारीबाग जिला डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित कुमार से सीधे फोन पर वार्ता कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और एम्बुलेंस की तकनीकी खराबी को अविलंब दूर करने की दोटूक चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्थिति के दौरान जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सा लाभ पहुंचाना प्रशासन और संबंधित कंपनी की पहली जवाबदेही है। इस कड़े विधिक और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित कुमार ने अधिकारिक तौर पर आश्वस्त किया है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर तकनीकी खामियों को पूरी तरह दुरुस्त कराकर एम्बुलेंस सेवा को धरातल पर दोबारा बहाल कर दिया जाएगा।
🛑 सरकारी तंत्र और संचालन कंपनी के ढुलमुल रवैये पर छलका दर्द; अधिकारी बोले—जेब से पैसे लगाकर एम्बुलेंस बनवाने को हूँ मजबूर
इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली हकीकत तब सामने आई जब सांसद प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान 108 एम्बुलेंस के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर रोहित कुमार का व्यवस्था के प्रति असली दर्द छलक पड़ा। उन्होंने एम्बुलेंस का संचालन करने वाली निजी कंपनी और झारखंड सरकार के उदासीन व लापरवाह रवैये पर सीधा प्रहार करते हुए साफ तौर पर स्वीकार किया कि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद बदतर और दयनीय बनी हुई है। उन्होंने लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि वे फिलहाल सरकारी या कंपनी फंड के भरोसे बैठने के बजाय अपने निजी पैसों से इस एम्बुलेंस की मरम्मत करवा रहे हैं क्योंकि ऊपर से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। इस खुलासे ने राज्य की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी टेंडरों पर चलने वाली कंपनियों की अकर्मण्यता की कलई खोलकर रख दी है कि कैसे आम जनता की जान बचाने वाली योजनाएं अधिकारियों की व्यक्तिगत लाचारी पर टिकी हुई हैं।
👤 पिछले वर्ष सांसद के ही विशेष प्रयास से मिली थी सौगात; अब ग्रामीणों और राहगीरों ने ली थोड़ी राहत की सांस
विदित हो कि टाटीझरिया प्रखंड क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती और प्राथमिकता रही है। पिछले वर्ष स्थानीय ग्रामीणों की लगातार बढ़ती मांग पर हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल के व्यक्तिगत और विशेष प्रयासों के बाद ही तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह के द्वारा इस क्षेत्र को पहली बार एक 108 एम्बुलेंस की सौगात दी गई थी। लेकिन अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की घोर लापरवाही के कारण यह चलती-फिरती जीवनदायिनी सेवा महज कुछ ही महीनों में कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गई थी। सांसद की इस हालिया और मजबूत विधिक पहल के बाद स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ एनएच पर सफर करने वाले राहगीरों ने थोड़ी राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन व्यवस्था की इस अंदरूनी सड़न ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

