हजारीबाग की सियासत में भूचाल: आजसू के कद्दावर नेता कौलेश्वर गंझू का पार्टी से 'मोहभंग', प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से दिया इस्तीफा
हजारीबाग:
हजारीबाग की राजनीतिक फिजाओं में रविवार को उस वक्त अचानक सरगर्मी बढ़ गई, जब आजसू पार्टी के एक सक्रिय और पहचाने जाने वाले चेहरे कौलेश्वर गंझू ने संगठन को अलविदा कह दिया। 8 फरवरी 2026 की तारीख अंकित एक त्यागपत्र सोशल मीडिया के विभिन्न पटल पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसने पार्टी के अंदरूनी खेमे में खलबली मचा दी है। इस वायरल पत्र के माध्यम से कौलेश्वर गंझू ने पार्टी आलाकमान को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा की है, जिसे स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आजसू के लिए एक बड़े संगठनात्मक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तैर रहे पार्टी के आधिकारिक लेटर पैड पर हस्तलिखित इस इस्तीफे में कौलेश्वर गंझू, पिता- पचाटी गंझू ने बेहद नपे-तुले और मर्यादित शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष को संबोधित करते हुए स्पष्ट लिखा है कि वे अपने कतिपय 'निजी कारणों' के चलते पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और संगठन द्वारा सौंपे गए सभी दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त हो रहे हैं। यद्यपि पत्र में किसी भी प्रकार की नाराजगी, मनमुटाव या गुटबाजी का खुलकर जिक्र नहीं किया गया है और केवल व्यक्तिगत कारणों को ही इस अलगाव का आधार बनाया गया है, तथापि चुनाव और सांगठनिक गतिविधियों के बीच एक समर्पित कार्यकर्ता का अचानक इस तरह पार्टी से किनारा कर लेना कई अनकहे सवालों को जन्म दे रहा है।
विदित हो कि कौलेश्वर गंझू की गिनती आजसू के उन नेताओं में होती थी जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच पैठ रखते थे। उनके इस अप्रत्याशित कदम से पार्टी की स्थानीय इकाई को निश्चित रूप से क्षति पहुँचने की संभावना है। फिलहाल, इस इस्तीफे पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल यह पत्र समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गहन चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी से मुक्त होने के बाद कौलेश्वर गंझू का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है और वे भविष्य में किस सियासी राह को चुनते हैं।
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