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Editor: Naresh Prasad Soni
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बैंक ऑफ इंडिया का महामंथन: हजारीबाग अंचल में ‘रिव्यू कम स्ट्रेटेजी मीट’ संपन्न, बैंकिंग सेवाओं में उत्कृष्टता और रिकवरी पर विशेष जोर

बैंक ऑफ इंडिया हजारीबाग अंचल द्वारा रिव्यू कम स्ट्रेटेजी मीट का आयोजन किया गया। महाप्रबंधक गुरु प्रसाद गोंड और आंचलिक प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने बैंकिंग
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बैंक ऑफ इंडिया का महामंथन, हजारीबाग अंचल में ‘रिव्यू कम स्ट्रेटेजी मीट’ संपन्न, बैंकिंग सेवाओं में उत्कृष्टता और रिकवरी पर विशेष जोर

हजारीबाग की बैंकिंग दुनिया में एक सकारात्मक अध्याय जोड़ते हुए बैंक ऑफ इंडिया, हजारीबाग अंचल द्वारा एक उच्च स्तरीय “रिव्यू कम स्ट्रेटेजी मीट” का भव्य आयोजन किया गया। इस रणनीतिक बैठक का मूल उद्देश्य न केवल विगत कार्यप्रदर्शन का सूक्ष्म विश्लेषण करना था, बल्कि आगामी वित्तीय लक्ष्यों को भेदने के लिए एक सुदृढ़ रूपरेखा तैयार करना भी था।

"सभागार को संबोधित करते हुए महाप्रबंधक गुरु प्रसाद गोंड। उन्होंने टीम भावना और परिणामोन्मुख कार्यशैली पर विशेष जोर दिया।"

"रणनीतिक बैठक में हिस्सा लेते हुए हजारीबाग अंचल के वरिष्ठ अधिकारी और शाखा प्रमुख। बैठक में आगामी वित्तीय लक्ष्यों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।"

​कार्यक्रम का आगाज भारतीय संस्कृति के अनुरूप दीप प्रज्वलन, ईश वंदना और राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे सभागार में एक ओजस्वी और सात्विक वातावरण निर्मित हो गया। इस महत्वपूर्ण सत्र में अंचल के शीर्ष अधिकारियों, शाखा प्रबंधकों और प्रोसेसिंग सेंटर के प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

​बैठक की अध्यक्षता करते हुए महाप्रबंधक (एफजीएमओ, रांची) श्री गुरु प्रसाद गोंड ने अपने उद्बोधन से उपस्थित अधिकारियों में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग केवल लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास का एक अटूट बंधन है। गोंड ने टीम भावना को सर्वोपरि बताते हुए ग्राहक-केंद्रित कार्यशैली अपनाने का आवाहन किया। उनका जोर इस बात पर था कि बैंक को परिणामोन्मुख दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा।

​वहीं, आंचलिक प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में परिचालन उत्कृष्टता (Operational Excellence) और गुणवत्तापूर्ण व्यवसाय पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी शाखा प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे केवल लक्ष्यों की प्राप्ति तक सीमित न रहें, बल्कि नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में अनुशासित होकर कार्य करें। उनकी बातों में भविष्य की चुनौतियों से निपटने और बैंक को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का दृढ़ संकल्प दिखाई दिया।

​वित्तीय सुदृढ़ता के लिए रिकवरी के महत्व को रेखांकित करते हुए उप आंचलिक प्रबंधक खिरोध चंद्र साहू ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परिसंपत्ति की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सतत निगरानी और प्रभावी फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को सक्रिय कार्यप्रणाली अपनाने का मंत्र दिया ताकि बैंक की आर्थिक नींव और अधिक मजबूत हो सके।

​समारोह के अंतिम चरण में, उत्कृष्ट कार्यशैली का प्रदर्शन करने वाले कर्मठ अधिकारियों और शाखाओं को “रिवार्ड एंड रिकग्निशन” कार्यक्रम के तहत सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने न केवल विजेताओं का मनोबल बढ़ाया, बल्कि अन्य कर्मियों को भी श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। साथ ही टीपीपी प्रस्तुति के माध्यम से भविष्य की योजनाओं का खाका खींचा गया।

​धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई। इस आयोजन ने हजारीबाग अंचल के समस्त बैंकिंग कर्मियों को एक नई दिशा और स्पष्ट लक्ष्य प्रदान किया है, जिससे यह निश्चित है कि बैंक ऑफ इंडिया आने वाले समय में अपनी सेवाओं में और अधिक निखार लाएगा।

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