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Editor: Naresh Prasad Soni
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चुनावी खर्च पर प्रशासन का कड़ा शिकंजा!! पाई-पाई का हिसाब देने के लिए मेयर और पार्षद प्रत्याशियों की पेशी तय, तीन चरणों में होगी लेखा परीक्षा

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चुनावी खर्च पर प्रशासन का कड़ा शिकंजा!! पाई-पाई का हिसाब देने के लिए मेयर और पार्षद प्रत्याशियों की पेशी तय, तीन चरणों में होगी लेखा परीक्षा

हजारीबाग:  नगरपालिका आम निर्वाचन 2026 के सियासी रण में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों पर अब जिला प्रशासन ने अपनी पैनी नजर गड़ा दी है। चुनाव प्रचार के शोर-शराबे के बीच धनबल के दुरुपयोग को रोकने और चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त ने कड़े तेवर दिखाए हैं। प्रशासन द्वारा जारी ताजा फरमान के मुताबिक, अब महापौर और वार्ड पार्षद पद के सभी उम्मीदवारों को अपनी चुनावी व्यय पंजी (इलेक्शन एक्सपेंडिचर रजिस्टर) के साथ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत होना होगा, जहाँ उनके एक-एक खर्च की सूक्ष्मता से जाँच की जाएगी।

निर्वाचन व्यय अनुश्रवण कोषांग ने इस महालेखा परीक्षा के लिए तिथियों का निर्धारण करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य होगी। आगामी 11 फरवरी, 16 फरवरी और 20 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाली इस सघन जाँच प्रक्रिया में प्रत्येक प्रत्याशी की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। प्रशासन ने इस कवायद को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए नया समाहरणालय भवन को केंद्र बनाया है, जहाँ अलग-अलग वार्डों के लिए अलग-अलग स्थलों का निर्धारण किया गया है ताकि जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता बनी रहे।

व्यवस्था के तहत वार्ड संख्या 01 से 12 तक के महापौर एवं पार्षद पद के अभ्यर्थियों का लेखा-जोखा नया समाहरणालय के सभागार में जाँचा जाएगा। वहीं, वार्ड संख्या 13 से 24 तक के उम्मीदवारों को इसी भवन के द्वितीय तल पर अपनी व्यय पंजिका प्रस्तुत करनी होगी, जबकि वार्ड संख्या 25 से 36 तक के प्रत्याशियों की जाँच ग्राउंड फ्लोर पर सुनिश्चित की गई है। नोडल पदाधिकारी सह राज्य कर पदाधिकारी ने दो टूक शब्दों में सभी राजनीतिक योद्धाओं को आगाह किया है कि वे तय समय और स्थान पर उपस्थित होकर अपने खर्चों का ब्यौरा दें। यदि कोई प्रत्याशी इसमें कोताही बरतता है, तो इसे निर्वाचन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और उन पर विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। लोकतंत्र के इस महापर्व में अब प्रत्याशियों को न केवल जनता की अदालत में, बल्कि प्रशासन की लेखा अदालत में भी अपनी ईमानदारी साबित करनी होगी।

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