हजारीबाग युवा अधिवक्ता सत्यम कुमार का कैंसर से निधन, विधि जगत में शोक की लहर; कल न्यायिक कार्यों से दूर रहेंगे वकील
Naresh Soni Editor in Chief
हजारीबाग के युवा अधिवक्ता सत्यम कुमार का 34 वर्ष की आयु में निधन। कैंसर से जूझ रहे सत्यम के सम्मान में 18 मार्च को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार।
संघर्षपूर्ण रहा जीवन और पेशेवर सफर
सत्यम कुमार ने साल 2017 में अधिवक्ता संघ, हजारीबाग के साथ जुड़कर अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की थी। शहर के जादोबाबू चौक के समीप निवास करने वाले सत्यम ने बहुत कम समय में अपनी कार्यकुशलता और मिलनसार स्वभाव के कारण वरिष्ठ और कनिष्ठ, दोनों ही वर्गों के अधिवक्ताओं के बीच अपनी एक खास पहचान बना ली थी। उनके सहकर्मियों का कहना है कि वे न केवल कानून के अच्छे जानकार थे, बल्कि एक नेक इंसान भी थे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सत्यम कुमार का असमय जाना उनके परिवार के लिए वज्रपात के समान है। महज तीन वर्ष पूर्व ही उनका विवाह हुआ था। वे अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी और एक महज डेढ़ वर्षीय मासूम पुत्र को छोड़ गए हैं। शाम करीब 6 बजे जब उनका पार्थिव शरीर रांची से हजारीबाग स्थित उनके आवास पर लाया गया, तो वहां का माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। सैकड़ों अधिवक्ताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
बार एसोसिएशन ने जताया गहरा शोक
उनके निधन की सूचना मिलते ही बार एसोसिएशन में शोक की लहर दौड़ गई। एसोसिएशन के सदस्यों ने इसे विधि जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। बार एसोसिएशन के प्रभारी संयुक्त सचिव कुणाल कुमार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "सत्यम एक होनहार अधिवक्ता थे। उनका जाना हम सभी के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।"
18 मार्च को शोक सभा और कार्य बहिष्कार
प्रभारी संयुक्त सचिव ने जानकारी दी कि सत्यम कुमार के सम्मान में बुधवार, 18 मार्च को बार एसोसिएशन में एक औपचारिक शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। इस शोक सभा के पश्चात सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि सभी अधिवक्ता स्वयं को न्यायिक कार्यों से अलग रखेंगे। कल हजारीबाग कोर्ट में कोई भी विधायी कार्य नहीं किया जाएगा।
कैंसर के प्रति जागरूकता की आवश्यकता
सत्यम कुमार का निधन स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता और कैंसर जैसे गंभीर रोगों के समय पर निदान की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर आज के समय में युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है, जिसके पीछे पर्यावरणीय कारक और जीवनशैली प्रमुख कारण हो सकते हैं।
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