हजारीबाग: डीसी की संवेदनशीलता, संत माइकल स्कूल के 160 दिव्यांग बच्चों को मिले श्रवण यंत्र, मिलेगी स्मार्ट क्लास की सौगात
हजारीबाग: जिला प्रशासन ने समाज के विशेष बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम उठाया है। बुधवार को हजारीबाग के उपायुक्त (DC) शशि प्रकाश सिंह ने दीपगढ़ा स्थित संत माइकल स्कूल फॉर द हियरिंग इंपेयर्ड (St. Michael School for the Hearing Impaired) का दौरा किया और वहां अध्ययनरत 160 बच्चों के बीच श्रवण यंत्र (Hearing Aids) का वितरण किया। इस नई तकनीक को पाकर मूक-बधिर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
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| हजारीबाग डीसी शशि प्रकाश सिंह ने संत माइकल स्कूल के 160 मूक-बधिर बच्चों को श्रवण यंत्र बांटे और विद्यालय को स्मार्ट क्लास की सौगात दी। |
प्रशासनिक अभिभावक की भूमिका में दिखे डीसी
श्रवण यंत्र वितरण के दौरान बच्चों से संवाद करते हुए उपायुक्त काफी भावुक और संवेदनशील नजर आए। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जिला प्रशासन एक अभिभावक की भूमिका में हमेशा उनके साथ खड़ा है। उनकी जो भी आवश्यकताएं होंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। उपायुक्त ने सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।
विद्यालय को मिली स्मार्ट क्लास की सौगात
इस खास मौके पर उपायुक्त ने केवल श्रवण यंत्र ही नहीं बांटे, बल्कि विद्यालय परिसर का विस्तृत भ्रमण कर वहां की मूलभूत सुविधाओं का जायजा भी लिया। उन्होंने कंप्यूटर लैब, साइंस लैब और हॉस्टल की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके साथ ही परिसर में शुद्ध पेयजल, बिजली की समुचित व्यवस्था और खेल के मैदान की स्थिति भी परखी।
निरीक्षण के दौरान जब शिक्षकों ने बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए 'स्मार्ट क्लास' (Smart Class) की आवश्यकता जताई, तो उपायुक्त ने बिना किसी देरी के इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृति प्रदान कर दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जल्द ही विद्यालय में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाएगी ताकि ये बच्चे भी नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनेगा संस्थान
उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने संत माइकल स्कूल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान विशेष बच्चों के जीवन को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों की आधुनिक आवश्यकताओं का आकलन कर एक सूची जिला प्रशासन को सौंपें। इस संस्थान को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने के लिए प्रशासन की ओर से हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अवसर पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शिप्रा सिन्हा, विद्यालय के तमाम शिक्षक-शिक्षिकाएं और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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