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Editor: Naresh Prasad Soni
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झारखंड की सियासत में भूचाल: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का आशियाना जमींदोज, NTPC की कार्रवाई पर भड़के कांग्रेस नेता

झारखंड के हजारीबाग में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का घर NTPC द्वारा ध्वस्त। जानें इस हाई-वोल्टेज कार्रवाई और योगेंद्र साव के तीखे आरोपों के पीछे की पूर
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झारखंड की सियासत में भूचाल: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का आशियाना जमींदोज, NTPC की कार्रवाई पर भड़के कांग्रेस नेता

हजारीबाग के जोरदाग झुमरी टांड़ में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर चलती जेसीबी और सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल। 

हजारीबाग : झारखंड की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत जोरदाग झुमरी टांड़ स्थित पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता योगेंद्र साव के आवास पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुल्डोजर चला। NTPC की चट्टी बरियातू कोल माइंस के ठीक सामने स्थित इस घर को कंपनी ने अवैध अतिक्रमण बताते हुए पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह पूरी कार्रवाई खनन क्षेत्र के लिए आवंटित भूमि पर किए गए निर्माण को हटाने के उद्देश्य से की गई थी।

भारी सुरक्षा के बीच हुई कार्रवाई

प्रशासनिक अमला और NTPC की टीम जब इस कार्रवाई के लिए पहुँची, तो वहां सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि अधिकारिक तौर पर खनन के लिए आवंटित है और कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद वहां से निर्माण नहीं हटाया गया था। इसी के चलते प्रशासन ने बल प्रयोग करते हुए घर को जमींदोज कर दिया।

योगेंद्र साव का तीखा हमला: "यह कांग्रेस को खत्म करने की साजिश"

आवास तोड़े जाने के बाद पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने एक वीडियो जारी कर सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब यह कार्रवाई हुई, वह घर पर नहीं थे और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक निर्मला देवी वहां मौजूद थीं। साव ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना या पर्याप्त समय दिए उनके घर और पहले उनकी फैक्ट्री को तोड़ा गया। उन्होंने इसे "अबुआ सरकार" का तांडव बताते हुए कहा कि यह केवल उनका घर नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी को बड़कागांव और पूरे राज्य में कमजोर करने की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की एक सोची-समझी साजिश है।

अमर्यादित भाषा और तीर से हमले का विवाद

इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में बीते दिनों हुई एक घटना का भी जिक्र हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले पूर्व मंत्री ने कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का उपयोग किया था और कंपनी के कर्मचारियों व वाहनों पर तीर-धनुष से हमला भी किया गया था। इस तनावपूर्ण माहौल के बाद ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया।

जनता और कानून का हवाला

योगेंद्र साव ने अपने संबोधन में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का जिक्र करते हुए राहुल गांधी के वादों की याद दिलाई और कहा कि विस्थापितों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में जनता इस 'दमनकारी' सरकार को सबक सिखाएगी। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी दायरे में रहकर की गई है ताकि खनन कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सके।

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