झारखंड पुलिस को मिले 1477 नए वाहन: MLA जयराम महतो ने उठाए तीखे सवाल, बताया क्यों केवल गाड़ियां काफी नहीं
रांची: झारखंड सरकार द्वारा पुलिस विभाग को सशक्त बनाने के लिए 1477 नए वाहनों की सौगात दी गई है। जहां एक ओर इसे पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं MLA जयराम महतो ने इस पर कड़ा तंज कसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गाड़ियों की रफ्तार से अपराध कम नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पुलिस प्रशासन की "इच्छाशक्ति" और "पारदर्शी व्यवस्था" की अधिक आवश्यकता है।
गाड़ियां नहीं, इच्छाशक्ति बदल सकती है कानून व्यवस्था
मीडिया से मुखातिब होते हुए जयराम महतो ने कहा कि राज्य की पुलिस व्यवस्था में इच्छाशक्ति का घोर अभाव है। उन्होंने कहा, "गाड़ियों की संख्या और उनकी रफ्तार अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त नहीं है। असली बदलाव तब आएगा जब पुलिस व्यवस्था भ्रष्टाचार से मुक्त होगी।"
ट्रांसफर-पोस्टिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
महतो ने पुलिस विभाग के भीतर चल रहे ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि थानों के प्रभारी (थानाध्यक्ष) बनने के लिए लाखों-करोड़ों रुपयों का लेन-देन होता है। उनके अनुसार, जब पुलिस अधिकारी खुद बड़ी राशि देकर पोस्टिंग पाते हैं, तो उनका ध्यान अपराध नियंत्रण के बजाय वसूली पर अधिक होता है।
अवैध खनिज ढुलाई और पुलिस की भूमिका
विधायक ने पत्रकारों को राज्य में चल रही अवैध गतिविधियों की ओर इशारा करते हुए एक 'स्टिंग ऑपरेशन' करने की चुनौती भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में पुलिस सुरक्षा देने के बजाय अवैध खनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों को बॉर्डर पार कराने में व्यस्त रहती है। उन्होंने कहा कि यह राज्य की एक कड़वी सच्चाई है जिसे सरकार को स्वीकार कर सुधारने की जरूरत है।

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