दहकती आग भी जिसके आगे हुई नतमस्तक: अटूट आस्था की शक्ति देख दंग रह गए लोग
मथुरा। ब्रज की होली अपनी विविधताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। जहाँ एक ओर बरसाने की लठमार होली की धूम रहती है, वहीं मथुरा के फालैन गाँव में अटूट विश्वास और भक्ति का एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसे देखकर विज्ञान भी हैरत में है। यहाँ एक 'पंडा' धधकती हुई होली की भीषण अग्नि के बीच से बिना किसी खरोंच के सुरक्षित बाहर निकल आया।
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| "आस्था की अग्नि: मथुरा के फालैन गांव में धधकती होली की लपटों को पार करते हुए पंडा, जहाँ विज्ञान की समझ भी भक्ति के आगे छोटी पड़ गई।" |
भक्त प्रहलाद की स्मृति में जीवंत परंपरा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा सतयुग के भक्त प्रहलाद की याद में निभाई जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि जो पंडा अग्नि कुंड को पार करता है, उस पर प्रहलाद जी की असीम कृपा होती है। इस वर्ष भी हज़ारों की भीड़ इस हैरतअंगेज दृश्य की साक्षी बनी। जैसे ही होली की लपटें आसमान छूने लगीं, पंडे ने जयकारों के बीच जलती चिता के समान इस ढेर को कुछ ही सेकंड में पार कर लिया।
कठिन साधना और ब्रह्मचर्य का पालन
खबरों के अनुसार, अग्नि कुंड को पार करने से पहले पंडा करीब डेढ़ महीने (सवा महीने) तक कठिन साधना करता है। इस दौरान वह अपने परिवार से दूर रहता है, अन्न का त्याग करता है और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करता है। वसंत पंचमी से ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पंडे का कहना है कि यह केवल उनकी भक्ति की शक्ति है जो उन्हें आग की तपिश महसूस नहीं होने देती।
पीढ़ियों से चली आ रही है रीत
यह कोई आधुनिक स्टंट नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक धार्मिक रीत है। गांव के लोग बताते हैं कि आज तक इस परंपरा के दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई है। पंडा अपनी साधना के बल पर न केवल आग पर विजय पाता है, बल्कि समाज को ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश भी देता है।

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