संसद में गूँजी विकास की हुंकार! प्रधानमंत्री ने बताया नए भारत का रोडमैप, बजट सत्र में विपक्ष पर तीखे प्रहार
नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के मंदिर, नए संसद भवन में चल रहे बजट सत्र के दौरान एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए न केवल सरकार की भविष्य की योजनाओं का खाका खींचा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक सशक्तिकरण पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। यह संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आगामी दशक के लिए भारत के संकल्पों की झलक दिखाई दी।
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विकसित भारत का संकल्प और आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामर्थ्य को नमन करते हुए की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। वीडियो में प्रधानमंत्री के आत्मविश्वास से भरे शब्द यह दर्शाते हैं कि सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे (Infrastructure), तकनीक और समावेशी विकास पर केंद्रित है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत 'पॉलिसी पैरालिसिस' के दौर से बाहर निकलकर 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मंत्र पर चल रहा है। उन्होंने डिजिटल इंडिया और फिनटेक के क्षेत्र में भारत की वैश्विक उपलब्धि का जिक्र करते हुए इसे दुनिया के लिए एक केस स्टडी बताया।
अर्थव्यवस्था और बजट की बारीकियां
सदन में बजट सत्र की चर्चा का जवाब देते हुए पीएम ने आर्थिक आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने मध्यम वर्ग (Middle Class) को देश की प्रगति का इंजन बताते हुए उनके लिए किए गए टैक्स सुधारों और जीवन की सुगमता (Ease of Living) पर जोर दिया।
सरकार की योजनाओं जैसे कि पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास पहुँच रहा है। पीएम के अनुसार, यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि गरीबों, युवाओं, महिलाओं और किसानों (GYAN) के सशक्तिकरण का एक सशक्त दस्तावेज है।
विपक्ष पर तंज और लोकतांत्रिक मर्यादा
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने चुटीले अंदाज में विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए रचनात्मक आलोचना जरूरी है, न कि केवल नकारात्मकता। उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और कहा कि देश की जनता सब देख रही है और वह केवल विकास की राजनीति को ही समर्थन देती है।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक विषयों पर भी सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 'ग्रीन एनर्जी' और 'सेमीकंडक्टर मिशन' जैसे प्रोजेक्ट्स आने वाले समय में भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री का यह संबोधन एक स्पष्ट संदेश था कि भारत अपनी विकास यात्रा को और गति देने के लिए तैयार है। सदन में उनकी बातों ने न केवल सांसदों में जोश भरा, बल्कि देश को एक नई दिशा देने का भी काम किया। अब देखना यह होगा कि इन संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन और जनता कैसे मिलकर काम करते हैं।
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