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Editor: Naresh Prasad Soni
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पुलिस लाइन में धूमधाम से मना सरहुल, उपायुक्त ने दिया 'जल-जंगल-जमीन' के संरक्षण का संदेश

हजारीबाग पुलिस लाइन में उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने सरहुल महोत्सव में शिरकत की। जानें प्रकृति संरक्षण और आदिवासी संस्कृति पर उनका विशेष संदेश।
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पुलिस लाइन में धूमधाम से मना सरहुल, उपायुक्त ने दिया 'जल-जंगल-जमीन' के संरक्षण का संदेश

हजारीबाग, झारखंड | 21 मार्च 2026

हजारीबाग पुलिस लाइन में सरहुल उत्सव के दौरान पारंपरिक नृत्य करते उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह एवं अन्य पुलिस अधिकारी।

झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और प्रकृति पूजा के महापर्व सरहुल की गूंज आज पूरे हजारीबाग जिले में सुनाई दी। इस विशेष अवसर पर हजारीबाग के समाहरणालय और पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस लाइन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिले के उपायुक्त  शशि प्रकाश सिंह शामिल हुए। उन्होंने न केवल उत्सव की शोभा बढ़ाई, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंध को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी दिया।प्रकृति पूजा के महापर्व सरहुल पर सखुआ फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते जिला पदाधिकारी।

पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य से जीवंत हुआ उत्सव

उत्सव का नजारा बेहद मनमोहक था जब उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पारंपरिक आदिवासी परिधानों में नजर आए। अधिकारियों ने स्थानीय कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर मांदर की थाप और पारंपरिक धुनों पर नृत्य किया। यह दृश्य प्रशासन और जनता के बीच के जुड़ाव को दर्शा रहा था।

प्रकृति पूजा के महापर्व सरहुल पर सखुआ फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते जिला पदाधिकारी।

सरहुल, जो वसंत ऋतु के आगमन और साल (सखुआ) के पेड़ों पर नए फूलों के खिलने का प्रतीक है, आज पुलिस लाइन के प्रांगण में पूरी जीवंतता के साथ मनाया गया। पारंपरिक गीतों के माध्यम से प्रकृति की आराधना की गई और अच्छी फसल व सुख-समृद्धि की कामना की गई।

प्रकृति और संस्कृति का समन्वय उपायुक्त का संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त  शशि प्रकाश सिंह ने सरहुल के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा

सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी उस जीवन पद्धति का हिस्सा है जो हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के ऋणी हैं। आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब सरहुल जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना किसी एक व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को न केवल संजोएं, बल्कि इसे आधुनिक संदर्भों में पर्यावरण संरक्षण के हथियार के रूप में भी इस्तेमाल करें।

सरहुल पर्व झारखंड की अस्मिता से जुड़ा है। हजारीबाग में आयोजित यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की उस सक्रियता को भी दर्शाता है, जहाँ वे स्थानीय परंपराओं को सम्मान देकर सामुदायिक एकता को बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस लाइन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल के बीच सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाना और तनावपूर्ण कार्यशैली के बीच प्रकृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करना था।

प्रकृति संरक्षण के लिए जिला प्रशासन की पहल

वृक्षारोपण अभियान

उपायुक्त ने संकेत दिया कि इस मानसून जिले में सखुआ और अन्य स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।

जल संचय

'जल-जंगल-जमीन' के नारे को साकार करने के लिए चेक डैम और तालाबों के पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है।

सांस्कृतिक पर्यटन 

हजारीबाग की समृद्ध आदिवासी विरासत को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है।

निष्कर्ष

हजारीबाग पुलिस लाइन में आयोजित इस सरहुल महोत्सव ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी परंपराएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। उपायुक्त का कलाकारों के साथ थिरकना और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता, जिले के नागरिकों के लिए एक मिसाल है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति हमारी रक्षा करेगी।

News Prahari - Naresh Soni Editor in Chief 

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