मुन्ना सिंह ने कहा- प्रकृति और परंपरा का संगम है यह महापर्व
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| हजारीबाग के सरहुल मैदान में केंद्रीय सरना समिति द्वारा पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह का स्वागत करते पदाधिकारी और पारंपरिक नृत्य करते कलाकार। |
हजारीबाग: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले हजारीबाग में आज प्रकृति के पावन पर्व सरहुल का भव्य आयोजन किया गया। स्थानीय सरहुल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहाँ आदिवासी संस्कृति की जीवंत परंपराओं और आधुनिक उत्साह का अनूठा मेल देखने को मिला। ढोल, नगाड़े और मांदर की थाप पर थिरकते कदम इस बात के गवाह थे कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़ाव कितना गहरा है।
मुख्य अतिथि मुन्ना सिंह का भव्य स्वागत
सदर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी और जनप्रिय नेता मुन्ना सिंह इस उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर उनके पहुँचते ही केंद्रीय सरना समिति के पदाधिकारियों ने पारंपरिक गर्मजोशी के साथ उनका अभिनंदन किया। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र उरांव (बैंक), मुख्य पहान बंधन तिग्गा और सरहुल पूजा समिति के अध्यक्ष पवन तिग्गा ने मुन्ना सिंह को पारंपरिक अंग वस्त्र भेंट किया और तिलक लगाकर स्वागत किया।
मुन्ना सिंह का संबोधन प्रकृति और मानव का अटूट रिश्ता
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उन्होंने आगे कहा कि नई फसल के आगमन और खिलते हुए फूलों का यह पर्व झारखंड की अस्मिता का प्रतीक है। मुन्ना सिंह ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को भी आगे बढ़ाएं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
उत्सव के दौरान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक मांदर नृत्य रहा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे युवक-युवतियों ने जब मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य किया, तो पूरा वातावरण उत्सव के रंग में सराबोर हो गया। प्रकृति गीतों के माध्यम से कलाकारों ने पर्यावरण की रक्षा और साल वृक्ष की महिमा का गुणगान किया। इस दृश्य को देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग एकत्रित हुए थे।
प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के कई प्रमुख चेहरों ने शिरकत की। आदिवासी नेता विक्की कुमार धान, युवा कांग्रेस की तेजतर्रार नेत्री कमल राज, और समाजसेवी दिनेश यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने सामूहिक रूप से प्रकृति की रक्षा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
सरहुल झारखंड की पहचान और पर्यावरण संदेश
झारखंड के परिप्रेक्ष्य में सरहुल का महत्व सर्वोपरि है। यह वह समय होता है जब वनराजि नई कोपलों से लद जाती है और सखुआ के फूल अपनी सुगंध बिखेरते हैं। हजारीबाग के इस कार्यक्रम में न केवल धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि बदलते जलवायु परिवेश में पेड़ों के महत्व पर भी चर्चा की गई। श्रद्धालुओं ने धरती माता से अच्छी वर्षा और खुशहाली की कामना की।
निष्कर्ष: सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
हजारीबाग में संपन्न हुआ यह सरहुल उत्सव इस बात का प्रमाण है कि झारखंड की मिट्टी में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान आज भी अडिग है। मुन्ना सिंह जैसे नेताओं की भागीदारी और सरना समिति के अथक प्रयासों ने इस कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक


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