हजारीबाग: महिला आरक्षण पर झामुमो का भाजपा पर तीखा हमला, प्रवक्ता कुणाल यादव ने 'पॉलिटिकल फिक्सिंग' का लगाया आरोप
"जब 2023 में बिल पास हो चुका है, तो लागू करने में देरी क्यों?" - कुणाल यादव ने उठाए केंद्र की मंशा पर सवाल।
हजारीबाग: झारखंड की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा रांची में आयोजित "महिला आक्रोश मार्च" को महज एक राजनीतिक पाखंड करार दिया है। उन्होंने भाजपा पर महिलाओं और विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समाज को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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| Kunal Yadav |
2023 के कानून और वर्तमान गतिरोध पर सवाल
कुणाल यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए याद दिलाया कि संसद ने साल 2023 में ही महिला आरक्षण बिल को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून में SC/ST वर्ग की महिलाओं के लिए 33% उप-आरक्षण का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।
प्रवक्ता ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा, "जब कानून पहले ही बन चुका है, तो इसे लागू करने के बजाय भाजपा भ्रम क्यों फैला रही है? केंद्र सरकार यह स्पष्ट करे कि देश में जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया कब पूरी होगी?"
131वें संविधान संशोधन की विफलता: भाजपा की अदूरदर्शिता?
हाल ही में 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर कुणाल यादव ने इसे भाजपा की 'विफलता' और 'पॉलिटिकल फिक्सिंग' बताया। उन्होंने इस विधेयक के मुख्य बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए कहा:
विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अचानक 850 करने का तर्क समझ से परे था।
जनगणना की शर्त हटाकर सीधे परिसीमन से जोड़ने की कोशिश में स्पष्ट रोडमैप की कमी थी।
पर्याप्त होमवर्क न होने के कारण यह विधेयक संसद में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।
"आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश"
झामुमो प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा इस संशोधन बिल की विफलता का ठीकरा विपक्ष पर फोड़कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा की टाइमिंग यह साफ करती है कि उनकी मंशा महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में फायदा उठाने की है।
कुणाल यादव ने अंत में कहा कि महिला आरक्षण देश की आधी आबादी का संवैधानिक हक है। देश को अब भ्रामक नारों या 'आक्रोश मार्च' की नहीं, बल्कि एक स्पष्ट समयसीमा की जरूरत है ताकि आरक्षण जल्द से जल्द जमीन पर लागू हो सके।
"आपको क्या लगता है, महिला आरक्षण लागू होने में देरी का मुख्य कारण क्या है? कमेंट में बताएं।"

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