हजारीबाग में DLSA ने पढ़ाया कानूनी पाठ: सभी 16 प्रखंडों में घर-घर पहुंचकर लोगों को किया जागरूक, लॉ स्टूडेंट्स को दिए गए साइबर फ्रॉड से बचने के कड़े टिप्स
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।
हजारीबाग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JALSA) के तत्वाधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), हजारीबाग के बैनर तले न्याय को जन-जन तक पहुँचाने का महा-अभियान जारी है। जिले में चलाए जा रहे 90 दिवसीय कानूनी जागरूकता आउटरीच कार्यक्रम के तहत बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया।
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यह पूरा अभियान प्रधान जिला न्यायाधीश सह अध्यक्ष (DLSA) ध्रुव चंद्र मिश्रा के कुशल दिशानिर्देशों और सचिव (DLSA) डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की सीधी मॉनिटरिंग में बेहद प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है।
सभी 16 प्रखंडों के गांवों और चौराहों पर सघन अभियान
बुधवार को हजारीबाग जिला अंतर्गत आने वाले सभी 16 प्रखंडों की विभिन्न पंचायतों में प्राधिकार द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकार मित्रों (Panel Speakers/PLVs) ने मोर्चा संभाला। अधिकार मित्रों ने न केवल चौक-चौराहों और कस्बों में शिविर लगाए, बल्कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में लोगों के घर-घर दस्तक देकर उन्हें कानून की बुनियादी जानकारियां दीं।
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शिविरों के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और गंभीर विषयों पर ग्रामीणों को विस्तार से जागरूक किया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
डायन भूत प्रतिषेध अधिनियम: समाज को कलंकित करने वाली डायन प्रथा के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न: महिलाओं के अधिकारों और उनके संरक्षण से जुड़े कानूनों के प्रति साक्षर बनाया गया।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के सामाजिक कुकृत्यों और अपराधों का असर सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है। भारत के संविधान में हर नागरिक को समान अधिकार के साथ सम्मानपूर्वक जीविकोपार्जन करने का अधिकार प्राप्त है।
डीएलएसए कार्यालय में लॉ स्टूडेंट्स को मिला साइबर सुरक्षा का पाठ
इसी कड़ी के तहत आज जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) कार्यालय परिसर में साइबर क्राइम (Cyber Crime) के विरुद्ध एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डीएलएसए सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने भविष्य के अधिवक्ताओं यानी लॉ स्टूडेंट्स (Law Students) को साइबर फ्रॉड से संबंधित तकनीकी और कानूनी जानकारियां दीं।
सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें बताईं:
किसी भी अनजान या जान-पहचान वाले व्यक्ति के साथ फोन पर अपना ओटीपी (OTP), बैंक अकाउंट नंबर, सीवीवी (CVV) या अन्य कोई भी निजी वित्तीय जानकारी साझा बिल्कुल न करें।
आज के दौर में साइबर अपराधी इन निजी जानकारियों के माध्यम से चंद मिनटों में बैंक खातों से गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं।
यदि कभी कोई व्यक्ति या उसका परिचित इस प्रकार के साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
इन महत्वपूर्ण टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
शिविरों और कार्यशाला के दौरान आम जनता को त्वरित और मुफ्त सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा जारी विभिन्न आपातकालीन टोल फ्री नंबरों के बारे में विस्तार से बताया गया:
निःशुल्क विधिक सहायता/परामर्श हेतु: 15100 (DLSA हेल्पलाइन)
साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने हेतु: 1930 (Cyber Helpline)
चाइल्ड हेल्पलाइन (बच्चों की सुरक्षा हेतु): 1098 (Childline)
इन नंबरों की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के इस कदम की भूरि-भूरि सराहना की। कई ग्रामीणों ने प्राधिकार के माध्यम से अपने लंबित छोटे-मोटे वाद-विवादों और पारिवारिक आपसी विवादों को सुलह (आपसी समझौते) के जरिए निपटाने की इच्छा और आशा प्रकट की। इस पूरे महा-अभियान में सैकड़ों महिला-पुरुषों सहित जिला विधिक सेवा प्राधिकार, हजारीबाग में कार्यरत सभी समर्पित अधिकार मित्र मुख्य रूप से शामिल रहे।


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