दारू थाना प्रभारी की अनूठी विधिक पहल: ग्रामीण इलाकों में सामाजिक कुरीतियों और क्राइम के खिलाफ पुलिस ने शुरू किया वॉल पेंटिंग महा-अभियान
"दीवारों पर उकेरी जा रही हैं बाल विवाह, घरेलू हिंसा और नशा मुक्ति के खिलाफ आकर्षक कलाकृतियां; राहगीरों और ग्रामीणों को कानून पालन की दी जा रही सीख"— ग्राउंड रिपोर्ट
क्राइम एवं प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग:
- रिपोर्टर: थाना संवाददाता (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): दारू थाना विधिक जागरूकता सेल (दिनांक: 14 जून 2026)
हजारीबाग:
ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, सामाजिक कुरीतियों के समूल नाश और आम जनता को विधिक नियमों के प्रति गंभीर व जागरूक बनाने के लिए हजारीबाग जिला पुलिस प्रशासन ने एक बेहद रचनात्मक और सराहनीय रुख अपनाया है। जिले के दारू थाना प्रभारी के कुशल नेतृत्व में दारू थाना क्षेत्र के ग्रामीणों को विभिन्न विधिक और सामाजिक विषयों पर जागरूक करने के मुख्य उद्देश्य से एक विशेष व वृहद 'वॉल पेंटिंग (दीवार लेखन व चित्रकारी) अभियान' युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। इस अनोखे अभियान के तहत दारू थाना क्षेत्र के सभी प्रमुख चौक-चौराहों, पंचायत भवनों, सरकारी स्कूलों की बाउंड्री और व्यस्ततम सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर रंग-बिरंगे आकर्षक चित्र, विधिक स्लोगन और मार्गदर्शक संदेश बनवाए जा रहे हैं। इन चित्रों के माध्यम से सीधे तौर पर ग्रामीण जनमानस को झकझोरने और उन्हें अपराध मुक्त समाज की स्थापना में भागीदार बनाने की विधिक कवायद की जा रही है।
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| "दारू पुलिस की अनोखी विधिक पहल! डंडे से नहीं, अब पेंटिंग और संदेशों से सुधरेगा समाज।" |
बाल विवाह, घरेलू हिंसा और सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर पुलिस का विधिक प्रहार
दारू पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत दीवारों पर उकेरी जा रही कलाकृतियों के माध्यम से समाज में पैर पसार चुकीं कई गंभीर कुरीतियों और विधिक अपराधों पर सीधा प्रहार किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकना, सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने व यातायात नियमों का पालन करने, नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने, घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के खिलाफ महिलाओं को विधिक रूप से सशक्त करने, 'बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ' के नारे को धरातल पर उतारने और समाज को खोखला करने वाली अन्य सामाजिक विधिक बुराइयों के प्रति ग्रामीणों को खुलकर जागरूक किया जा रहा है।
वॉल पेंटिंग है जनता से सीधा जुड़ाव का सबसे प्रभावी माध्यम: थाना प्रभारी
इस विशेष जागरूकता अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए दारू थाना प्रभारी ने साफ तौर पर कहा कि ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में 'वॉल पेंटिंग' जन-जागरूकता का एक अत्यंत प्रभावशाली, विजुअल और स्थाई विधिक माध्यम है। चौक-चौराहों से गुजरने वाले लोगों और ग्रामीणों तक ये विधिक संदेश बेहद आसानी और प्रभावी ढंग से सीधे दिलो-दिमाग तक पहुंचते हैं। दीवारों पर लिखे गए ये विधिक संदेश और प्रेरणादायक चित्र ग्रामीणों को हर पल सामाजिक बुराइयों से दूर रहने, किसी भी प्रकार के घरेलू व सामाजिक अपराध का विधिक विरोध करने और देश के कानून का पूरी निष्ठा से पालन करने के लिए निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। पुलिस की इस अनूठी और संवेदनशील पहल की समूचे दारू प्रखंड और हजारीबाग जिले के प्रबुद्ध नागरिकों व ग्रामीणों ने मुक्त कंठ से सराहना की है।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (बाल विवाह निषेध, घरेलू हिंसा एवं विधिक जागरूकता नियमावली)
📌 जानिए सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बने कड़े देश के विधिक कानून क्या हैं?
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (Prohibition of Child Marriage Act): इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की या 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कराना एक संज्ञेय और गैर-जमानती विधिक अपराध है। इसमें शामिल माता-पिता, पंडित/पुरोहित और टेंट-कैटरिंग वालों को भी 2 साल तक की कठोर जेल और 1 लाख रुपये तक के विधिक जुर्माने का प्रावधान है।
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005: शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या मौखिक रूप से किसी भी महिला को प्रताड़ित करना इस कानून के तहत सीधे दंडनीय विधिक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें पीड़ित महिला को पुलिस प्रशासन द्वारा तत्काल विधिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाती है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: दारू पुलिस की 'कम्युनिटी पुलिसिंग' मिसाल, पर चित्रों के साथ शिकायत नंबर लिखना भी जरूरी (Editorial)
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आमतौर पर पुलिस की छवि डंडे, कड़ाई और मुकदमों के इर्द-गिर्द सिमटी होती है, लेकिन दारू थाना प्रभारी ने कम्युनिटी पुलिसिंग (Community Policing) का जो उदाहरण पेश किया है, वह बेहद अनुकरणीय है। बाल विवाह, घरेलू हिंसा और नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों को दीवारों के जरिए उठाना सीधे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को पुलिस के करीब लाता है। हालांकि, 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि इस विधिक अभियान को और अधिक धारदार बनाने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। साथ ही, इन वॉल पेंटिंग्स के ठीक नीचे दारू थाने का आधिकारिक सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर, महिला हेल्पलाइन नंबर (181) और साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर (1930) भी अनिवार्य रूप से बड़े अक्षरों में लिखा जाना चाहिए, ताकि कोई भी पीड़ित ग्रामीण दीवार पर संदेश देखने के साथ ही सीधे और बिना किसी डर के पुलिस से विधिक संपर्क स्थापित कर सके।

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