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Editor: Naresh Prasad Soni
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केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी की अध्यक्षता में 'दिशा' की बैठक; विधायक प्रदीप प्रसाद ने उठाए अस्पताल, बिजली और जर्जर सड़कों के गंभीर मामले

हजारीबाग दिशा बैठक में विधायक प्रदीप प्रसाद ने जिला अस्पताल की बदहाली, बिजली कटौती, पेयजल संकट और जर्जर सड़कों के मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
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हजारीबाग दिशा की बैठक में गूंजे जनहित के मुद्दे: विधायक प्रदीप प्रसाद ने जिला अस्पताल की बदहाली और बिजली-पानी संकट पर प्रशासन को घेरा

जिला समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक में जनहित के मुद्दों पर अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग।

आईसीयू की खराब स्थिति, बार-बार बिजली कटौती, जर्जर एनएच और पेयजल संकट पर विधायक ने जताई गंभीर चिंता।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।

हजारीबाग: जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सह कोडरमा लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद अन्नपूर्णा देवी ने की। बैठक में हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने मुख्य रूप से भाग लिया और अपने विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न जनहित से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को बेहद मजबूती और प्रमुखता के साथ पटल पर रखा।

Disha Ki Baithak 

अस्पताल की बदहाली पर गहरी चिंता:

बैठक के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद ने हजारीबाग जिला अस्पताल (सदर अस्पताल) की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर रोष और चिंता व्यक्त की। उन्होंने अस्पताल के आईसीयू की दयनीय स्थिति, बार-बार बिजली गुल होने से मरीजों को होने वाली जानलेवा परेशानियों, उपचार प्रबंधन में भारी कमियों और पोस्टमार्टम हाउस की अव्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रशासन से अविलंब सुधारात्मक कदम उठाने को कहा ताकि आम नागरिकों को सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

Disha Ki Baithak 

बिजली और लो-वोल्टेज का मुद्दा:

विधायक ने हजारीबाग शहर और ग्रामीण इलाकों में हो रही अनियंत्रित बिजली कटौती तथा लो-वोल्टेज की समस्या को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि इससे आम जनता, व्यापारियों, किसानों और विशेषकर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने और उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित निवारण करने के निर्देश दिए।

जर्जर सड़कें और एनएचएआई (NHAI) की लापरवाही:

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अंतर्गत आने वाली सड़कों की खस्ताहाल स्थिति का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि जर्जर सड़कों के कारण रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं और राहगीरों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सड़कों के अविलंब मरम्मत और दुरुस्तीकरण का कार्य शुरू करने का आग्रह किया।

पेयजल और जलजमाव का संकट:

गर्मी के मौसम को देखते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने क्षेत्र में गहराते पेयजल संकट और कई इलाकों में स्वच्छ पानी की अनुपलब्धता का मामला उठाया। इसके साथ ही, उन्होंने शहर में जलजमाव की चिरपरिचित समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि बरसात में जलभराव से पूरा जनजीवन ठप हो जाता है। उन्होंने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक ठोस और प्रभावी कार्ययोजना बनाने पर बल दिया।

बैठक में उपस्थित गणमान्य:

इस उच्चस्तरीय बैठक में हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल, बड़कागांव विधायक रोशनलाल चौधरी, बरही विधायक मनोज कुमार यादव, बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव, मांडू विधायक निर्मल महतो, बगोदर विधायक नागेंद्र महतो शामिल हुए। वहीं प्रशासनिक पक्ष से उपायुक्त हेमंत सती, पुलिस अधीक्षक अमन कुमार, उप विकास आयुक्त रिया सिंह सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

​बैठक की समाप्ति पर विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हजारीबाग की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षेत्र का चहुंमुखी विकास ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। वे जनता की आवाज को हर स्तर पर मजबूती से बुलंद करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण / संपादकीय टिप्पणी (Sampadakiye)

​'दिशा' (DISHA) की बैठकों का मूल उद्देश्य धरातल पर चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा करना और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आवाज को प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाना है। हजारीबाग की बैठक में विधायक प्रदीप प्रसाद द्वारा उठाए गए मुद्दे—जैसे कि सदर अस्पताल की बदहाली, बिजली-पानी का संकट और एनएच की जर्जर सड़कें—सीधे तौर पर आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन और गरिमा से जुड़े हैं।

​अस्पताल के आईसीयू की खराब स्थिति और बिजली बैकअप न होना बेहद संवेदनशील मामला है, जो सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसे केवल एक बैठक की औपचारिक चर्चा न मानकर आपातकालीन स्थिति की तरह ठीक करना चाहिए। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए इन गंभीर विषयों पर यदि अधिकारी समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो ऐसी बैठकों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अधिकारियों की जवाबदेही तय होना अब समय की सबसे बड़ी मांग है।

जन सुझाव / पब्लिक सजेशंस (Public Suggestions)

  1. सदर अस्पताल के लिए विशेष टास्क फोर्स: अस्पताल की बिजली और आईसीयू बैकअप की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक स्वतंत्र तकनीकी टीम तैनात की जाए, जो साप्ताहिक रूप से निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपे।
  2. बिजली कटौती का फिक्स शेड्यूल: बिजली विभाग मनमानी कटौती बंद कर लोड शेडिंग का एक निश्चित समय घोषित करे और लो-वोल्टेज की समस्या दूर करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए।
  3. एनएचएआई (NHAI) की जवाबदेही: जर्जर राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिह्नित कर तुरंत पैच वर्क और सड़क सुधार का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।
  4. जलजमाव व ड्रेनेज मास्टर प्लान: शहर को जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए मानसून के आगमन से पहले बड़े नालों की गाद निकाली जाए और जल संकट से निपटने के लिए सुदूर क्षेत्रों में टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए।

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