हजारीबाग: एसपी के निर्देश पर जिले भर के थानों में शांति समिति की बैठक आयोजित; आपसी सौहार्द से बकरीद मनाने की अपील
डीएसपी, एसडीपीओ और अंचलाधिकारियों की मौजूदगी में प्रबुद्ध जनों के साथ हुआ विचार-विमर्श; प्रशासन ने त्योहार को लेकर जारी किए आवश्यक दिशा-निर्देश।
हजारीबाग: आगामी ईद-उल-अज़हा (बकरीद) पर्व 2026 को पूरे जिले में शांति, आपसी भाईचारे और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने को लेकर हजारीबाग जिला पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक (SP) हजारीबाग के दिशा-निर्देशानुसार, रविवार (24 मई 2026) को जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 'शांति समिति' की बैठकों का व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है।
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| Shanti Samity ki Baithak. |
जिले के अलग-अलग थानों में आयोजित इन बैठकों का नेतृत्व संबंधित क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) ने किया। बैठकों में मुख्य रूप से स्थानीय थाना प्रभारी, पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर), अंचलाधिकारी (CO) सहित थाना क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति, प्रबुद्ध नागरिक और केंद्रीय शांति समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
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| Sthaniye Jan. |
आपसी सौहार्द और मर्यादा पर हुआ गहन विचार-विमर्श
बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय प्रबुद्ध जनों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। प्रशासन द्वारा थाना क्षेत्र के वासियों से अपील की गई कि वे इस पवित्र पर्व को शांति और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाएं। इसके साथ ही, त्योहार से संबंधित कई आवश्यक और कड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए गए:
स्थानीय समन्वय: सभी अंचलाधिकारियों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि वे स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी कमेटियों के साथ लगातार संपर्क में रहें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।
साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं: कुर्बानी के बाद अवशेषों के व्यवस्थित निष्पादन और नगर निकाय व पंचायत स्तर पर साफ-सफाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
सख्त निगरानी: असामाजिक और उपद्रवी तत्वों पर पैनी नजर रखने तथा किसी भी प्रकार की संदेहास्पद गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करने की हिदायत दी गई।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारियों ने बैठक में विशेष रूप से डिजिटल सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने शांति समिति के सदस्यों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं को सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करें। किसी भी भ्रामक, सांप्रदायिक या अनवेरिफाइड (बिना जांचे) मैसेज, वीडियो या पोस्ट को व्हाट्सएप, फेसबुक या इंस्टाग्राम पर आगे बढ़ाने से पूरी तरह बचने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि अफवाह फैलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
✍️ शॉर्ट सम्पादकीय (Short Editorial):
शीर्षक: शांति समितियों की सार्थकता और धरातल पर नागरिक समन्वय
त्योहारों के करीब आते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा थानों में शांति समिति की बैठकें आयोजित करना हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का एक अनिवार्य और सफल हिस्सा रहा है। हजारीबाग एसपी के निर्देश पर जिले के तमाम अनुमंडलों और थानों में डीएसपी, एसडीपीओ और अंचलाधिकारियों की उपस्थिति में इन बैठकों का होना यह साबित करता है कि प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर है। किसी भी क्षेत्र की शांति केवल पुलिस की लाठियों और बंदूकों के दम पर कायम नहीं रखी जा सकती; उसके लिए स्थानीय जनता, समाज के प्रबुद्ध जनों और प्रशासन के बीच सीधा और पारदर्शी संवाद होना सबसे जरूरी शर्त है।
इस बार की बैठकों में अंचलाधिकारियों (CO) और गणमान्य व्यक्तियों की संयुक्त भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि जमीनी स्तर पर भूमि संबंधी या स्थानीय छोटे विवाद त्योहारों के समय बड़ा रूप ले लेते हैं, जिन्हें यह टीम आपसी विमर्श से तुरंत सुलझा सकती है। हालांकि, इन बैठकों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शांति समिति के सदस्य केवल बैठकों में शामिल होने तक सीमित न रहें, बल्कि वे अपने-अपने मोहल्लों और गांवों में जाकर शांति और भाईचारे के इस संदेश को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं। जब समाज का हर वर्ग सजग रहकर अफवाहों को नकारेगा और प्रशासन का सहयोग करेगा, तभी त्योहारों की असली रौनक और सौहार्द सुरक्षित रह सकेगा।


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