🏛️ हजारीबाग: जमीन रजिस्ट्री के नियमों में बड़ा बदलाव; उपायुक्त ने दिए कड़े निर्देश, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान और वंशावली अनिवार्य
हजारीबाग: जिला समाहरणालय भवन में भूमि निबंधन (रजिस्ट्री) प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, जवाबदेह और विधिसम्मत बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त हेमन्त सती की अध्यक्षता में अवर निबंधक के साथ हुई इस बैठक में जमीन रजिस्ट्री के दौरान होने वाले फर्जीवाड़े और विवादों पर लगाम लगाने के लिए कई कड़े फैसले लिए गए हैं। उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि शासन के प्रावधानों एवं न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करते हुए सभी मामलों का समयबद्ध निष्पादन किया जाए। निबंधन प्रक्रिया को जनहितकारी बनाने के लिए विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया है ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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| हजारीबाग: समाहरणालय भवन में अवर निबंधक के साथ समीक्षा बैठक कर भूमि निबंधन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वंशावली अनिवार्य करने का निर्देश देते उपायुक्त हेमन्त सती। (फोटो: न्यूज़ प्रहरी) |
🏬 एलपीसी और वंशावली का होगा कड़ा सत्यापन; हिस्सेदारों की उपस्थिति के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री
बैठक में जमीन की हेराफेरी रोकने के लिए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि किसी भी भूमि के निबंधन से ठीक पहले संबंधित भूमि की लैंड पजेशन सर्टिफिकेट यानी एलपीसी और अन्य आवश्यक राजस्व अभिलेखों का समुचित भौतिक व तकनीकी सत्यापन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शपथ-पत्र, नोटरी और संयुक्त एलपीसी जैसे संवेदनशील मामलों में निबंधन कार्यालय विशेष सतर्कता बरते। किसी भी प्रकार की त्रुटि, विसंगति या संदेह की स्थिति उत्पन्न होने पर पूरी विधि सम्मत जांच के उपरांत ही अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के तहत अब भूमि के सभी कानूनी हिस्सेदारों की भौतिक उपस्थिति अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बाद ही निबंधन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इसके साथ ही, रैयतों और जमीन मालिकों को वैध एवं सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत की गई डिजिटल वंशावली प्रस्तुत करना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
🛑 अदालती मामलों और वित्तीय लेनदेन पर पैनी नजर; फर्जी कागजात पर पूरी तरह रोक
उपायुक्त ने विशेष रूप से हिदायत दी है कि सिविल कोर्ट या अन्य न्यायालयों में लंबित मामलों से संबंधित विवादित भूमि के निबंधन के दौरान अवर निबंधक विशेष सावधानी बरतें। ऐसे मामलों की विधिक स्थिति का समुचित परीक्षण करने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वित्तीय पारदर्शिता को लेकर यह निर्देश दिया गया है कि निबंधन के दौरान ली जाने वाली सरकारी राशि को ऑनलाइन चेक करने के बाद ही अधिकारी स्वयं संतुष्ट होकर प्रक्रिया पूरी करें। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली अवैध जमीन रजिस्ट्री की हर संभावना को जड़ से खत्म करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड एवं राजस्व अभिलेखों का ऑनलाइन मिलान अनिवार्य होगा। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि सभी स्तरों पर एक प्रभावी जांच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे भू-माफियाओं और फर्जी कागजात बनाने वाले गिरोहों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।

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