VBU Hazaribagh: विभावि फिजियोथेरेपी विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी; एम्स के डॉ. प्रभात रंजन ने पार्किंसनिज्म और आधुनिक इलाज पर दिए टिप्स
हजारीबाग (News Prahari Desk): विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU), हजारीबाग के भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) विभाग द्वारा 27 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सी.वी. रमन साइंस ब्लॉक-1 के आर्यभट्ट सेमिनार हॉल में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।
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| National seminar on Parkinsonism and Physiotherapy at Vinoba Bhave University Hazaribagh Aryabhatta Hall |
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय “पार्किंसनिज़्म” एवं “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” रखा गया था। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने फिजियोथेरेपी के बढ़ते महत्व, न्यूरो रिहैबिलिटेशन और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत और प्रशासनिक संबोधन
संगोष्ठी का शुभारंभ विभागाध्यक्ष डॉ. उमेन्द्र सिंह के स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) चन्द्र भूषण शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और विभाग को मिलने वाले निरंतर प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया। विभागाध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से आने वाले समय में भी फिजियोथेरेपी के अत्याधुनिक और समसामयिक विषयों पर ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने विभाग को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान, क्लिनिकल रिसर्च और व्यावसायिक दक्षता को निखारने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अम्बिका गुप्ता द्वारा किया गया। वहीं डॉ. मेराज नबी सिद्दीकी ने फिजियोथेरेपी विभाग का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए विभाग की स्थापना, उपलब्धियों और देश-विदेश में कार्यरत पूर्व विद्यार्थियों (Alumni) की सफलताओं पर प्रकाश डाला।
एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञ का 'पार्किंसनिज्म' पर मुख्य व्याख्यान
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के न्यूरो रिहैबिलिटेशन विभाग के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रभात रंजन (पी.टी.) थे। उन्होंने 'पार्किंसनिज्म' (Parkinsonism) बीमारी के लक्षणों और फिजियोथेरेपी आधारित पुनर्वास पर विस्तृत तकनीकी व्याख्यान दिया।
डॉ. प्रभात रंजन ने कहा:
"पार्किंसनिज्म से पीड़ित मरीजों में मांसपेशियों की अकड़न, हाथों में कंपन और संतुलन बिगड़ने की समस्या मुख्य रूप से देखने को मिलती है। समय पर बीमारी की प्रारंभिक पहचान, वैज्ञानिक मूल्यांकन, बैलेंस ट्रेनिंग (सुलतान प्रशिक्षण) और एविडेंस-बेस्ड (साक्ष्य-आधारित) फिजियोथेरेपी के जरिए मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार लाया जा सकता है।"
झारखंड स्टेट काउंसिल और अन्य विशेषज्ञों के विचार
द्वितीय वक्ता झारखंड स्टेट काउंसिल ऑफ फिजियोथेरेपी (JSCPT) के रजिस्ट्रार एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) झारखंड के संयोजक डॉ. अजीत कुमार (पी.टी.) थे। उन्होंने “आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी की भूमिका” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि आज फिजियोथेरेपी केवल ऑर्थोपेडिक समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्डियाक, न्यूरो और स्पोर्ट्स मेडिसिन में भी इसका दायरा तेजी से बढ़ा है। उन्होंने शोध आधारित उपचार और प्रोफेशनल एथिक्स पर जोर दिया।
विशिष्ट वक्ता रांची की डॉ. आयुषी (पी.टी.) ने “थिंक बियॉन्ड द शोल्डर” विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने कंधे की जटिल समस्याओं के समग्र मूल्यांकन और आधुनिक रिहैबिलिटेशन तकनीकों की जानकारी छात्रों के साथ साझा की।
राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. राहुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन विद्यार्थियों की मेडिकल समझ को गहरा करने में उपयोगी साबित होगा। संगोष्ठी का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
Department of Physiotherapy - Vinoba Bhave University (VBU) Press Release & Desk Analysis
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